(कोलकाता): सैन फ्रांसिस्को से मुंबई जा रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को उसके बाएं इंजन में आई तकनीकी खराबी के कारण मंगलवार तड़के कोलकाता में रोकना पड़ा। फ्लाइट संख्या AI180 अपने नियमित मार्ग पर थी और निर्धारित ठहराव के तहत सोमवार-मंगलवार की रात करीब 12:45 बजे कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी थी।
कैसे पता चली प्लेन की तकनीकी समस्या
बता दें कि जब विमान टेकऑफ़ की तैयारियों में था, तभी एयरलाइन की इंजीनियरिंग टीम ने नियमित जांच के दौरान इंजन में तकनीकी समस्या की पहचान की। समस्या की गंभीरता को देखते हुए पायलट ने तत्काल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आगे की उड़ान को स्थगित करने का निर्णय लिया। इसके बाद विमान में सवार सभी यात्रियों को मंगलवार सुबह लगभग 5:20 बजे विमान से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
यात्रियों की सुरक्षा है सर्वोपरि
एयर इंडिया की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए यह निर्णय एहतियात के तौर पर लिया गया। कंपनी ने बताया कि यात्रियों को एयरपोर्ट पर सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, जिनमें खानपान, विश्राम व्यवस्था और आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक फ्लाइट्स की तैयारी शामिल है। फिलहाल विमान की तकनीकी जांच जारी है और एयर इंडिया की इंजीनियरिंग टीम इंजन की समस्या को दूर करने के लिए काम कर रही है। यदि निर्धारित समय सीमा में विमान सेवा में वापस नहीं आता है, तो यात्रियों को दूसरी उड़ानों से उनके गंतव्य तक भेजा जाएगा।
यात्रियों ने एयर इंडिया स्टाफ को सराहा
घटना के बाद कुछ यात्रियों ने सोशल मीडिया पर एयर इंडिया स्टाफ की तत्परता सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने लंबी प्रतीक्षा और सूचना में हुई देरी को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालांकि अधिकांश यात्रियों ने यह माना कि ऐसी स्थितियों में सुरक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के दौरान इंजन से जुड़ी तकनीकी समस्या को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। उड़ान संचालन से पहले हर स्टॉप पर फ्लाइट की बारीकी से तकनीकी जांच की जाती है। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता का संदेह होता है, तो उड़ान को आगे नहीं बढ़ाया जाता।
यह घटना एक बार फिर यह स्पष्ट करती है कि हवाई यात्रा में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। एयर इंडिया द्वारा समय पर की गई कार्रवाई न केवल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि तकनीकी खामियों को नजरअंदाज करना एयरलाइन की नीति में शामिल नहीं है।