Mahashivratri 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह साल का अंतिम महीना होता है और इसे भगवान महादेव को समर्पित किया गया है। इसी महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का महत्वपूर्ण त्योहार आता है। महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का विशेष पूजन और व्रत किया जाता है।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह त्योहार भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करने का एक विशेष अवसर होता है। अब ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में जागरण का विशेष महत्व है।
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती महाशिवरात्रि की रात भ्रमण पर निकलते हैं। इसलिए इस दिन रातभर जागकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती हैं। भगवान शिव का पूजन और भजन किया जाता है। ऐसा करने से भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। भक्तों की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
वैज्ञानिक कारण
दूसरी तरफ, वैज्ञानिक दृष्यिकोण से भी महाशिवरात्रि अहम मानी जाती है। विज्ञान की मानें तो महाशिवरात्रि की रात ग्रहों और नक्षत्रों की खास स्थिति होती है। जिससे एक विशेष ऊर्जा का प्रवाह होता है। महाशिवरात्रि की रात मनुष्य को परमात्मा से जोड़ती है। इसलिए महाशिवरात्रि की रात जागरण करने और रीढ़ की हड्डी सीधी करके ध्यान लगाने को कहा जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर में भी पूजा की जाएगी। पहले प्रहर के पूजा का समय 26 फरवरी की शाम 06:43 बजे से रात 09:47 बजे तक है। दूसरे प्रहर के पूजा का समय रात 09:47 से लेकर मध्यरात्रि के 12:51 बजे तक होगा। तीसरे प्रहर के पूजा का समय 27 फरवरी की रात मध्यरात्रि 12:51 बजे से लेकर सुबह 03:55 बजे तक रहेगा। चौथे प्रहर के पूजा का समय सुबह 03:55 बजे से 06:59 बजे तक रहेगा।