West Bengal: विधानसभा में एंटी रेप बिल पास, दोषी को 10 दिन में होगी फांसी की सजा, जानिए विधेयक में क्या-क्या है प्रावधान

West Bengal Anti Rape Bill: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दो दिन के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एंटी रेप बिल को पास कर दिया। इस नए कानून में बलात्कार के दोषी को 10 दिन के अंदर फांसी की सजा का प्रावधान है। नए कानून के तहत बलात्कार मामले की 21 दिनों में जांच पूरी करनी होगी। रेप पीड़िता के कोमा में जाने या मौत होने पर 10 दिन के अंदर दोषी को फांसी पर लटका दिया जाएगा।

अब एंटी बलात्कार विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद से यह कानून बन जाएगा। ममता सरकार ने एंटी रेप बिल को ‘अपराजिता’ महिला एवं बाल विधेयक (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून एवं संशोधन) बिल 2024 नाम दिया है। राज्य सरकार ने बिल पारित करने के लिए 2 सितंबर से दो दिन विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया था। कानून मंत्री मलय घटक ने इसे विधानसभा में पेश किया था।

बता दें कि, कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या मामले को लेकर देशभर में आक्रोश है। कोलकाता से लेकर दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सड़कों पर डॉक्टर उतर आए थे। देशभर में कानून व्यवस्था को लेकर ममता सरकार की आलोचना की गई थी। इसके बाद में ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दो चिट्ठी लिखी थी।

बिल तुरंत लागू हो- बीजेपी

अब इस कानून को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि हम इस कानून को तत्काल प्रभाव से लागू कराना चाहते हैं और यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हम परिणाम चाहते हैं, कोई बंटवारा नहीं। हम पूरा समर्थन करते हैं। मुख्यमंत्री को जो कहना है कह सकती हैं लेकिन गारंटी देनी होगी कि यह बिल तुरंत लागू होगा।

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इस कानून को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि हमने केंद्रीय कानून में मौजूद खामियों को दूर करने की कोशिश की है। विपक्ष को राज्यपाल से विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए कहना चाहिए, उसके बाद इसे अधिनियमित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारी सरकार पूरे प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

नए कानून में क्या-क्या है प्रावधान….

रेप-गैंगरेप के दोषियों को बिना पैरोल के उम्र कैद की सजा काटनी होगी।

पीड़िता की मौत होने या कोमा में जाने पर 10 दिन के अंदर दोषी को फांसी दी जाएगी।

बलात्कार की जांच को 21 दिन में पूरा करना होगा और इसे अधिकतम 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।

हर जिले में अपराजिता टास्क फोर्स बनाई जाएगी। इसका नेतृत्व डीएसपी लेवल के अधिकारी करेंगे।

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