Parliament Winter Session: शीतकालीन सत्र के 17वें दिन लोकसभा में आपराधिक तीन बिलों को पास किया गया। सदन में आतंकवाद, महिला विरोधी अपराध, देशद्रोह और मॉब लिंचिंग से संबंधित नए प्रावधान पेश किए गए। इन बिलों को ऐसे समय में पेश किया गया जब दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के 143 सदस्यों को निलंबित कर दिया गया। जिनमें लोकसभा के 97 और राज्यसभा के 46 सदस्य शामिल है।
बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता विधेयक-2023 और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023 बिल पेश करते हुए कहा कि इन बिलों के पेश करने का उद्देशय कानून व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
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नए बिलों में बदले प्रावधान
नए बिल में गैंगरेप के मामलों को लेकर अब 20 साल की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया। यही नहीं अब झूठे वादे या पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाना भी अब अपराध की श्रेणी में शामिल होगा। जिसमें 18 साल से कम आयु की लड़की से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास या मृत्यु दंड का प्रावधान शामिल किया गया। यौन हिंसा के मामलों में बयान महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट ही रिकॉर्ड करेगी। पीड़िता का बयान उसके आवास पर महिला पुलिस अधिकारी के सामने ही दर्ज किया जाएगा।
राजद्रोह का कानून खत्म
इसके अलावा केन्द्र सरकार ने राजद्रोह जैसे कानूनों को समाप्त कर दिया। बिल में मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का प्रावधान कर दिया। अब आजीवन कारावास को 7 साल की सजा में बदला जा सकेगा। नए बिल में भारतीय न्याय संहिता में आतंकवाद की व्याखा की गई है और उसे दंडनीय अपराध बनाया गया है।
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इससे कोई भी आतंकवादी कानून की किसी भी कमी का फायदा नहीं उठा सकेगा। नए बिल में नस्ल, जाति और समुदाय के आधार पर की गई हत्या के लिए नया प्रावधान पेश किया गया है। इस बिल में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर आजीवन कारावास से लेकर मौत की सजा तक का प्रावधान है।