Delhi Air Pollution: संकट में सांसे…फिर नहीं चलाया जा रहा स्मॉग टावर, जानिए वजह

Delhi Air Pollution: राजधानी दिल्ली इस समय प्रदूषण की चपेट में हैं। गुरुवार को राजधानी में वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच गया था। जिसके बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया और कक्षा 5वीं तक के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया। लेकिन इस जहरीली हवा में शहरवासी सांस ले रहे हैं। दमघोंटू धुएं में लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्मॉग टावर लॉक

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दमघोंटू जहरीली हवा के बावजूद स्मॉग टावर को बंद किया गया है। स्मॉग टावर का उद्घाटन साल 2021 में सीएम अरविंद केजरीवाल ने किया था। कनॉट प्लेस में स्थित 23 करोड़ रुपए का स्मॉग टावर लॉक है।

खबरों के मुताबिक, स्मॉग टावर का प्रबंधन करने वाले इंजीनियरों, ऑपरेटरों और सहायकों सहित 10 लोगों की एक टीम थी। हालांकि सात महीने पहले टीम को हटा दिया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक ये अप्रभावी पाए गए हैं। 24 मीटर ऊंचे स्मॉग टावर में प्रति सेकंड एक किलोमीटर के दायरे में 1,000 क्यूबिक मीटर हवा को साफ करने की क्षमता थी।

कनॉट प्लेस में है स्थित

40 पंखे और 5,000 एयर फिल्टर से सुसज्जित, टावर प्रदूषित हवा को सोखता है और फ़िल्टर की गई हवा को छोड़ता है। कनॉट प्लेस में स्मॉग टावर प्रायोगिक तौर पर लगाया गया था। दिल्ली के प्रदूषण हॉटस्पॉट में से एक आनंद विहार में एक और स्मॉग टावर खोला गया। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने दो साल लंबी परियोजना के बाद स्मॉग टावर को बंद करने का सुझाव दिया था।

जिसमें पता चला था कि स्मॉग टावर से 100 मीटर की दूरी पर पार्टिकुलेट मैटर (PM) में कमी केवल 12 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के आसपास थी। समिति ने सुझाव दिया कि साइट को उन्नत किया जाए और पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन नवाचार केंद्र के रूप में उपयोग किया जाए।

IIT-Bombay द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी पाया गया कि PM 2.5 और PM1 0 की सांद्रता को कम करने की स्मॉग टॉवर की क्षमता 300 मीटर और 500 मीटर की दूरी पर भी कम थी। DPCC ने आगे कहा कि व्यापक वायु गुणवत्ता को देखते हुए टावर का प्रभाव बहुत सीमित था।

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