संतोष कुमार सिंह
पटना: आनंद मोहन भले बिहार में न हो लेकिन उनको लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। अलगअलग लोग अलगअलग दावे। इस बीच आनंद मोहन बिहार से बाहर देश के अलगअलग हिस्सों में लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं। विशेष रूप से राजस्थान में क्षत्रिय समाज के रैलियों में शामिल हो रहे हैं, राजस्थान में राजस्थान में राजपूत करणी सेना के आयोजनों में व्यस्त हैं। इस बीच बिहार में इस बात के कयास लगाये जा रहे हैं कि क्या आनंद मोहन जदयू में शामिल होंगे या राजद में ही बने रहेंगे। दरअसल आनंद मोहन अभी किसी दल में नहीं हैं, भले ही उनकी पत्नी और विधायक बेटे चेतन आनंद राजद के सदस्य है।
वैसे भी आनंद मोहन ये कह चुके हैं कि जहां उन्हें और समाज को सम्मान मिलेगा, वे वहीं जाएंगे। संसद में ठाकुर के कुंआ विवाद के बाद जिस तरह से आनंद मोहन ने राजद सांसद मनोज झा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मैं सदन में होता तो जीभ खींच लेता और आसन की ओर उछाल देता। इसके बाद जिस तरह से लालू परिवार और पूरी पार्टी मनोज झा के साथ खड़ी हुई तो दोनों के बीच दूरियां बढ़ती नजर आईं।
उसके बाद बिहार की जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट आई। इसके आकड़ों को लेकर सवाल उठे। कहा गया कि इसमें अगड़ी जातियों की संख्या 15.52प्रतिशत आ गई। लालू ने जिस भू-रा-बा-ल साफ करो का कभी नारा दिया था, वह जातीय जनगणना में लगभग साफ नजर आया। भूमिहार 2.89प्रतिशत, राजपूत 3.45प्रतिशत, ब्राह्मण 3.67और लाला (कायस्थ) 0.6प्रतिशत बताए गए। अगड़ी जाति के आंकड़ों में मुसलमानों की अगड़ी जातियां भी हैं। मतलब, हिंदू की चार प्रमुख अगड़ी जातियों की आबादी 10फीसदी के आसपास है।
आनंद मोहन ने जातिगत सर्वेक्षण को लेकर तो सरकार का सर्मथन किया लेकिन आंकड़ों को लेकर सवाल खड़ा कर दिया और कहा कि वे इस विषय पर मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उसके अगले दिन ही आनंद मोहन की मुख्यमंत्री से मुलाकात भी होती है। लेकिन इस मुलाकात में क्या बात हुई इसको लेकर अलगअलग कयास लगाये जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि आनंद मोहन जल्द ही जेडीयू में शामिल हो सकते हैं।
लेकिन इस मसले पर न तो आनंद मोहन ने कुछ कहा है और न ही जदयू की तरफ से ही कोई बयान सामने आया है। यहां तक जदयू अध्यक्ष ललन सिंह भी इस तरह की किसी जानकारी से इंकार कर दिया है। वैसे में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर ये खबरें आ कहां से रही है या फिर कयासों के सहारे मीडिया खबरें चला रही हैं।
इस बीच आनंद मोहन बिहार से बाहर राजस्थान में अपने समाज से जुड़ी रैलियों में शिरकत करते दिखाई दे रहे हैं और उनकी भेट मुलाकातों की जो तस्वीरें सामने आ रही है उसमें सभी दल के नेता शामिल है।
फिलहाल जातीय जनगणना के आंकड़ों पर अविश्वास को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहां आपत्तियों को समझने की बात कही थी, वहां मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बीमारी से लौटने के बाद दो टूक कह दिया कि इसकी समीक्षा की जरूरत नहीं है। तो, अब यह मान लेना मजबूरी ही है कि आंकड़ा नहीं बदलेगा।
ऐसे में ये सवाल उठता है कि फिर आनंद मोहन क्या करेंगे? क्योंकि आनंद मोहन बड़े नेता हैं। अपने समाज में खासी पैठ रखते हैं। इस बीच आनंद मोहन ने यह भी ऐलान किया है कि वे 22नवंबर को पटना के गांधी मैदान में बड़ी रैली करेंगे जिसमें 10लाख से ज्यादा की भीड़ जुटेगी और पूरा पटना पट जायेगा।
ऐसे में आनंद मोहन के करीबियों का कहना है कि नेता जी बिना समाज की राय लिये कोई भी फैसला नहीं लेंगे और जो भी फैसला होगा वो नवंबर की रैली के बाद ही होगा कि पार्टी बनाना है या फिर किसी दल में शामिल होना है। लोगों की आम राय भी यही है कि आनंद मोहन अभी कुछ फैसला शायद नहीं करें, क्योंकि इससे उनके साथ रहने वाले राजपूत वोटर निर्णय लेने के लिए आजाद हो सकते हैं। साथ आ भी सकते हैं, छोड़ भी सकते हैं।