संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: क्षेत्रीय दलों को लेकर भाजपा नेतृत्व हमेशा पसोपेश में होता है। एक तरफ इंडिया के कुनबे की तुलना में एनडीए का कुनबा बढ़ाया जा रहा है वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बिहार की धरती से एक बार फिर से क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व समाप्त होने की बात कह रहे हैं। ऐसा नहीं है नड्डा ने यह पहली बार कहा हो। नड्डा ने पिछले साल ही ऐसा बयान दिया था जिससे आहत होकर आहत होकर नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जेडीयू को भाजपा से गठबंधन समाप्त कर लिया था। कारण और भी हो सकते हैं लेकिन इसी बात को नीतीश ने आधार बनाया।
आज की भाजपा जिस एनडीए की अगुआई करने का दावा करती है उसमें 38 दल शामिल हैं। बावजूद इसके पार्टी अध्यक्ष यह कहते हैं कि क्षेत्रीय दल खत्म हो जायेंगे। एक बार नहीं बारबार कहते हैं ऐसे में क्षेत्रीय के मन में आशंका लाजिमी है। सवाल यह भी है कि यदि क्षेत्रीय दल समाप्त हो जाएंगे। जीतन राम मांझी की पार्टी हम और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलजेडी का क्या होगा? मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी भी एनडीए में आने का रास्ता खोज रही है। तो फिर ये दल क्या करेंगे? इन दलों ने भले ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान पर चुप्पी साध रखी है या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन सवाल सामने है कि क्या नड्डा अगर अपने बयान पर कायम हैं तो क्या साथी दलों का विलय बीजेपी में हो जाएगा ?
जेपी नड्डा ने दोहराया- नहीं बचेंगी क्षेत्रीय पार्टियां
दरअसल भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कैलाश पति मिश्र की 100वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पटना आये हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा अब दूसरे को कंधे पर नहीं बिठाएगी, बल्कि अपने बूते बिहार में सरकार बनाएगी। जेडीयू को लक्ष्य कर कही उनकी इस बात का मतलब साफ है कि एनडीए के साथ अभी जितने क्षेत्रीय दल हैं, उन्हें भाजपा दरकिनार कर देगी। इसके पहले भी जेपी नड्डा ने कहा था कि अब क्षेत्रीय दलों का दौर खत्म हो रहा है। राष्ट्रीय दलों को छोड़ कर क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। भले ही उनका बयान जेडीयू और राजद को लक्ष्य करके दिया गया हो लेकिन इसका असर एनडीए के साथी दलों पर होना स्वाभाविक है।
नड्डा का बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। भाजपा भी क्षेत्रीय दलों को जोड़ कर एनडीए का कुनबा बढ़ाने में लगी है। अभी 38 क्षेत्रीय दल एनडीए में शामिल हैं। एनडीए छोड़ चुके शिरोमणि अकाली दल और एआईडीएमके को साथ लाने का भाजपा प्रयास कर रही है। नड्डा कुछ कह रहे हैं और पार्टी किसी और रास्ते पर चल रही है। यानी एक तरफ एनडीए का कुनबा बढ़ाने के लिए वह क्षेत्रीय दलों की तलाश में है तो दूसरी तरफ पार्टी अध्यक्ष क्षेत्रीय दलों के खात्मे की बात करता है।