कनाडा व भारत के बीच बिगड़ते संबंधो से पीस न ​जाएं ​कनाडा के किसान, दाल उत्पादक किसान होंगे प्रभावित

संतोष कुमार सिंह

नयी दिल्ली: कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के अड़ियल रूख और भारत सरकार के जवाबी कार्रवाई का असर भारत कनाडा रिश्तों पर तो हुआ ही है साथ ही इससे वहां के किसान भी अछूते नहीं रहेंगे। क्योंकि दोनो देशों के बीच बिगड़ते संबंधो का सीधा असर वहां के किसानों पर होता दिख रहा है। दरअसल ट्रूडो ने जून में हुई खालिस्तानी आतंकवादी और कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को भारत सरकार से जोड़ते हुए आधारहीन आरोप लगाए थे। इसका सीधा असर दोनो देशों के संबंधो पर तो हुआ ही है साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में दरार आना शुरू हो गई है। यह निस्संदेह कनाडा के लिए हानिकारक है।

भारत ने कम किया दाल आयात

ट्रूडो के इस आरोप के बाद भारत के कनाडा से मसूर के आयात पर साफ असर दिख रहा है। इंडस्ट्री के सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रूडो द्वारा पिछले हफ्ते भारत पर आरोप लगाने के बाद से भारत का कनाडा से मसूर का आयात धीमा हो गया है। सूत्रों ने बताया कि भारत द्वारा बदला लेने की आशंका है, जिससे व्यापार सीमित हो सकता है। दिल्ली चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे एक पत्र में केंद्र सरकार से कनाडा से मसूर के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। जिससे उस पर आर्थिक दबाव डाला जा सके।

इतनी दाल बेचता है कनाडा

भारत की वार्षिक दाल खपत लगभग 23लाख टन है। इसमें से 15-16लाख टन घरेलू रूप से उत्पादित की जाती है और शेष अन्य देशों से आयात की जाती है। पिछले वित्त वर्ष में, भारत ने कनाडा से 4.85लाख टन मसूर का आयात किया, जिसकी कीमत लगभग 370मिलियन डॉलर (करीब 3,071करोड़ रुपये) थी। यह उसके कुल मसूर आयात का आधे से अधिक है। यह कनाडा को भारत के खाद्य व्यापार में एक महत्वपूर्ण प्लेयर बनाता है।

चिंतित हैं कनाडा के व्यापारी

भारतीय खरीदारों ने इस साल की शुरुआत से ही कनाडा से अच्छी-खासी मात्रा में मसूर खरीद ली है, जिसकी डिलीवरी फसल कटाई के बाद होगी। विन्निपेग बेस्ड क्रॉप ट्रेडर पैरिश एंड हेइमबकर के सीनियर एक्सपोर्ट मर्चेंट केविन प्राइस ने रॉयटर्स को बताया, जाहिर है कि हम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए चिंतित हैं कि बिक्री अच्छे से हो जाए। प्राइस ने कहा कि उन्हें किसी भी तरह के कैंसिलेशन के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने आगे कहा, क्या वे अभी और मसूर खरीदना चाहते हैं? नहीं। वे इंतजार करने और देखने का रवैया अपना रहे हैं। प्राइस ने कहा कि ट्रूडो की टिप्पणियों के बाद से भारतीय खरीदारों ने कनाडाई मसूर के लिए अपनी पेशकश 6%घटाकर 770डॉलर प्रति मीट्रिक टन कर दी है।

व्यापार प्रतिबंध की आशंका से घबराये व्यापारी

एक प्रमुख आयातक ओलाम एग्री इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने रॉयटर्स से कहा, इंडस्ट्री के अधिकारियों को चिंता है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव के कारण सरकारों द्वारा व्यापार प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है।

कीमत चुकायेंगे कनाडा के किसान

भारत मसूर के अपने आयात में विविधता ला रहा है और अब वह किसी एक देश पर बहुत अधिक निर्भर नहीं है। ऑस्ट्रेलिया से मसूर का आयात बढ़कर लगभग दो लाख टन हो गया है। भारत ने रूस से भी मसूर का आयात शुरू कर दिया है। रूसी मसूर की एक खेप अगस्त में चेन्नई बंदरगाह पर उतरी थी। अगर भारत कनाडा से मसूर के आयात को कम कर देता है, तो इससे कनाडा में मसूर की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे कनाडाई किसानों को ट्रूडो के भारत के खिलाफ लापरवाह रवैये की कीमत चुकानी होगी।

भारत पर क्या होगा असर

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2022-23में भारत ने कनाडा से 3,012करोड़ रुपये की कीमत में 4.85लाख टन मसूर का आयात किया था। वहीं, इस साल अप्रैल और जून के बीच कनाडा से लगभग एक लाख टन मसूर का आयात किया गया है। टीओआई से बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, हमारी 23लाख टन मसूर की वार्षिक खपत के मुकाबले घरेलू उत्पादन लगभग 16लाख टन है। वहीं, लगभग छह लाख टन हमारे बंदरगाहों पर पहुंच चुका है। इसलिए हम सहज हैं और हमें किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। कनाडा से अधिकांश मसूर पहले से ही यहां हैं।

भारत मसूर आयात में बढ़ा रहा विविधता

कहा जा रहा है कि विदेशी उत्पादकों को एक स्पष्ट संकेत देने के लिए सरकार मार्च 2024के बाद मसूर पर शून्य आयात शुल्क जारी रख सकती है। भारत ने हाल ही में अमेरिका से आयातित मसूर को किसी भी प्रकार के सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट दे दी है। एग्री कमोडिटी रिसर्च फर्म आईग्रेन इंडिया के राहुल चौहान ने हाल ही में ईटी को बताया, ऑस्ट्रेलिया ने इस साल मसूर आयात के मामले में कनाडा को पीछे छोड़ दिया है। अगर भारत के मसूर आयात में विविधता बढ़ती रहती है, तो यह सुनिश्चित करेगा कि भारत कमी की चिंता किए बिना कनाडा से आयात कम कर सकता है।

ट्रूडो के कारण कनाडा के किसानों को नुकसान

जाहिर है दोनो देशों के रिश्तों का सीधा असर किसानों पर होगा। अगर आने वाले वर्षों में भारतीय आयात में कमी के कारण कनाडाई किसानों को नुकसान होता है, तो यह साबित होगा कि ट्रूडो ने अपने देश के हितों को अपने संकीर्ण चुनावी लाभ के लिए भुनाया है। यह वे खालिस्तानी मतदाताओं को खुश करके करना चाहते हैं।

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