National Daughters Day: 24 सितंबर को क्यों मनाया जाता है डॉटर्स-डे, पढ़िए इसके पीछे का महत्व

National Daughters Day:भारत देश में बेटियों को देवी का दर्जा दिया जाता है। कहीं कोई पिता अपनी बेटी को आदिशक्ति का रूप मानता है तो कोई लक्ष्मी का रूप मानता है। हालांकि कुछ स्थानों पर इसके विपरीत देखा जाता रहा है कि घर में बेटी के पैदा होने पर लोगों में मातम पसर जाता है और कुछ लोग बेटी पैदा होने को अशुभ मानते हैं।

बेटियों को दिया जाता है देवी का दर्जा

लेकिन भारतीय परंपरा और भारतीय धर्म में बेटियों को हमेशा से ही देवियों का दर्जा दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि बेटियां संसार की जननी है। संसार की शुरुआत खुद माता आदिशक्ति से हुई है। ऐसे में भारतीय परंपराओं में हमेशा से बेटियों को अव्वल दर्जे पर रखा गया है। लेकिन समय के साथ बेटियों से अधिकार छीने गए, फिर समय बदला और बेटियों को उनके अधिकार फिर मिलने लगे। आज राष्ट्रीय बेटी दिवस है। बेटियां किसी भी क्षेत्र में अपना काम बखूबी कर रही हैं। ऐसे में आपको जानना चाहिए कि आखिर इस खास दिन का इतना महत्व क्यों है।

भारत में डॉटर्स-डे का खास महत्व

बता दें कि, बेटियों के प्रति दुनियाभर में फैले नकारात्मकता के खिलाफ दुनियाभर के देश मिलकर बेटियों को समान अधिकार दिलाने के लिए इस खास दिन को मनाते हैं। हर साल सितंबर महीने की 4 तारीख को बेटी दिवस मनाया जाता है। बेटियों के हक और उनकी आवाज को उठाने के लिए इस खास दिन को मनाया जाता है। भारत में भी इस दिन का खास महत्व है। हालांकि 24 सितंबर को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस मनाया जाता है।

हजारों साल पहले बेटियां (महिलाएं) अपने घर में मर्दों की ही तरह मुख्य किरदार में हुआ करती थीं। लेकिन जब समाज में अपवाद बढ़ने लगे तब समय के साथ बेटियों की शक्ति और उनकी क्षमताओं को भी छीना गया। हालांकि एक समय ऐसा भी आया जब बेटी पैदा होने को लोग अशुभ मानने लगे। हालांकि, ये अशुभ मानने की शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि समाज में दहेज प्रथा ने घर कर लिया था और बेटी की शादी में दहेज न देना पड़े इसलिए इसे अशुभ बताते हुए बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता था।

लेकिन अब समय बदल चुका है। सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा भी लगातार कई अभियान चलाए गए। इसका परिणाम हुआ कि आज बेटियां अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं और सभी क्षेत्रों में नाम कमा रही है। हम सबको मिलकर बेटियों के प्रति समाज में फैली गंदगी के खिलाफ लड़ना होगा और बेटियों को पूरी तरह महफूज रखना होगा। मातृशक्ति के खुश रहने पर ही घर में खुशियां आती हैं।

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