Haryana: अब रजिस्ट्री में नहीं रही क्लर्कों की भूमिका, जानिए सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?

चंडीगढ़:हरियाणा में पूरे प्रदेश के क्लर्क इस समय अपना वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर लगभग एक महीने से हड़ताल कर रहे हैं। इस दौरान राज्य सरकारके साथ उनकी 3 दौर की बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार और प्रदर्शकारी क्लर्कों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। चूंकि लिपिकों के हड़ताल पर रहने से रजिस्ट्री बंद पड़ी है। ऐसे में सरकार को अब तक 300 करोड़ से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके साथ ही आम जनता को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसको देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

अब तहसीलदार के पास होगी रजिस्ट्री

दरअसल, हरियाणा की मनोहर सरकार ने राज्य में बंद पड़ी रजिस्ट्री को सरकार ने दोबारा शुरू करवाने का फैसला लिया है। लिपिकों के अनुपस्थिति के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही थी। जिसके कारण सरकार को आर्थिक नुकसान तो हुआ ही इसके साथ ही आम जनता को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ी। ऐसे में सरकार ने रजिस्ट्री में क्लर्कों की भूमिका ही खत्म कर दी है। सरकार द्वारा बनाए गए नए नियम के अनुसार रजिस्ट्री का आवेदन अब सीधे तहसीलदार के पास जाएगी और वहीं से रजिस्ट्री होगी

इससे पहले जारी हुआ नो वर्क नो पे का ऑर्डर

बता दें कि प्रदेशभऱ में लिपिकों के हड़ताल के कारण रजिस्ट्री का काम बंद पड़ा था। ऐसे में रजिस्ट्री में क्लर्कों की भूमिका खत्म करने से पहले राज्य सरकार की तरफ से प्रदर्शनकारी क्लर्कों के खिलाफ नो वर्क नो पे का ऑर्डर जारी किया गया। बावजूद इसके हड़ताल कर रहे क्लर्क अपना प्रदर्शन खत्म कर काम पर वापस नहीं लौटे। जिसके बाद अब सरकार ने यह फैसला लिया है कि अब रजिस्ट्री सीधे तहसीलदार के पास जाएगी।

3 दौर की बैठक में भी नहीं निकला हल

गौरतलब है कि इस मामले पर हरियाणा में क्लर्क एसोसिएशन और सरकार के बीच अब तक 3 दौर की वार्ता हो चुकी है। आखिरी बैठक पिछले बुधवार (26 जुलाई) को हुई थी जो सुबह से शाम तक चली, 35,400 ग्रेड पे किए जाने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया है। यह भी स्पष्ट किया कि पे स्केल सरकार बढ़ाएगी, लेकिन इतना नहीं जितना वह मांग रहे हैं। वहीं मीटिंग में शामिल क्लर्क एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने उन्हें कोई ऑफर नहीं दिया। मांगों को लेकर कोई सकारात्मक बात नहीं होने के कारण क्लर्क एसोसिएशन अपनी हड़ताल जारी रखेगा।

ये है पूरा मामला

दरअसल, प्रदर्शनकारी क्लर्क 5 जुलाई से ही हड़ताल कर रहे हैं। जिसके कारण 105 तहसीलों और सब तहसीलों में रजिस्ट्रियों का काम बंद पड़ा है। इससे सूबे को 300 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो गया है। प्रदर्शनकारी क्लर्कों का कहना है कि 1957 में एक सरकारी क्लर्क को 60 रुपये से 175 रुपये मासिक मूल वेतन मिलता था। समान स्तर के अन्य सरकारी कर्मचारियों को उस समय समान या उससे कम वेतन मिलता था। लेकिन अब अन्य समान रैंक वाले अधिकारियों – जैसे जेबीटी (जूनियर बेसिक टीचर), जूनियर इंजीनियर, वन विभाग में डिप्टी रेंजर और स्वास्थ्य विभाग में बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एमपीएचडब्ल्यू) का मूल वेतन 35,400 रुपये प्रति माह की दर से मिल रहा है, जबकि क्लर्कों को 19,900 रुपये प्रति माह का मूल वेतन मिल रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि पड़ोसी राज्य पंजाब अपने क्लर्कों को 32,100 रुपये प्रति माह का मूल वेतन दे रहा है जो हरियाणा की तुलना में बहुत अधिक है। 2014 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले, भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने पर क्लर्कों के वेतनमान को अपग्रेड करने और उन्हें पंजाब के बराबर करने की घोषणा की थी। हालाँकि, कांग्रेस चुनाव हार गई और इसके साथ ही क्लर्कों और अन्य कर्मचारियों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं।

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