नई दिल्ली: मणिपुर में हो रही हिंसा और हिंसा के दौरान दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और उनका यौन उत्पीड़न करने की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। सुनवाई को दौरान केंद्र और राज्य सरकार को कोर्ट के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। जब एक वकील ने बंगाल में हाल की चुनावी हिंसा का मुद्दा उठाया तो भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मणिपुर में जो हुआ उसे यह कहकर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि यह और कहीं भी हुआ।
कोर्ट ने कहा कि इस तथ्य में कोई दो राय नहीं है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध सभी हिस्सों में हो रहे हैं, लेकिन मणिपुर जैसे देश के एक हिस्से में जो हो रहा है, उसे आप इस आधार पर माफ नहीं कर सकते कि इसी तरह के अपराध वहां भी हो रहे हैं। सवाल यह है कि हम मणिपुर से कैसे निपटें? इसका उल्लेख करें…क्या आप कह रहे हैं कि भारत की सभी बेटियों की रक्षा करें या किसी की भी रक्षा न करें?
महिलाओं के साथ हुए कुकृत्य को एससी ने बताया भयानक
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों को भयानक बताया और कहा कि वह नहीं चाहती कि इस मामले को मणिपुर पुलिस संभाले। इसमें कहा गया है, हमारे लिए समय समाप्त होता जा रहा है, राज्य में उपचार की बहुत आवश्यकता है।कोर्ट ने ये भी कहा कि, यह निर्भया जैसा सिर्फ एक मामला नहीं है। यह एक अलग घटना है। यहां यह एक प्रणालीगत हिंसा है।
कपिल सिब्बल ने मणिपुर पुलिस पर लगाया ये आरोप
वहीं, दोनों महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मणिपुर पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस हिंसा को अंजाम देने वाले दोषियों के साथ सहयोग कर रही थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने पुलिस से सुरक्षा मांगी, लेकिन वे उन्हें भीड़ में ले गए।सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच का अनुरोध करते हुए सिब्बल ने कहा कि, सरकार के पास यह बताने के लिए डेटा नहीं है कि ऐसे कितने मामले दर्ज किए गए हैं। जो इन मामलों की स्थिति को दर्शाता है।
इसके बाद अदालत ने केंद्र से पूछा कि मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद से दर्ज की गई लगभग 6,000 एफआईआर में से कितनी महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए थीं। केंद्र ने कहा कि उसके पास ऐसे मामलों का ब्योरा नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार से सुनवाई के दौरान सभी FIR, जांच के लिए उठाए गए कदम, पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाए गए आदि मुद्दों पर जवाब मांगा है।
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार ने इन सवालों का मांगा जवाब
बता दें कि सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने तीखे सवाल उठाए और केंद्र और मणिपुर से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट द्वारा किए गए सवालों में मामलों का विवरण, कितनी जीरो एफआईआर, थाने में कितनों का स्थानांतरण, अब तक कितने गिरफ्तार, गिरफ्तार अभियुक्तों को कानूनी सहायता की स्थिति और अब तक कितने धारा 164 के बयान (या निकटतम मजिस्ट्रेट के सामने बयान) दर्ज किए गए, इत्यादि शामिल है जिसका जवाब केंद्र और राज्य को 24 घंटे में देने हैं। इस मामले में कोर्ट कल यानी मंगलवार को फिर सुनवाई करेगी।