SC ने संवैधानिक पीठ को भेजा दिल्ली अध्यादेश मामला, 5 जजों की बेंच करेगी केस की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली अध्यादेश मामले में लगाई गई याचिका पर गुरुवार को फिर से सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक पीठ को भेज दिया है। अब/पांच जजों की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। बता दें मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दिए थे कि यह मामला संवैधानिक पीठ के पास भेजा सकता हैं।

सुप्रीम कोर्ट ही इसपर फैसला करे-दिल्ली सरकार

दिल्ली अध्यादेश पर 20 जुलाई को सीजेआई डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच में सुनवाई हुई।इस दौरान दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अदालत के कहने पर हम एलजी के पास गए थे और तीन नाम सौंपे गए थे।इस दौरान डीआरईसी के चेयरमैन की नियुक्ति के मुद्दे पर सहमति नहीं बनी थी। इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट ही इस मामले को तय करे।
DERC चेयरमैन नियुक्त नहीं कर सकते- SC

वहीं, उपराज्यपाल की ओर सेवरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे अपना पक्ष रखा। एलजी वीके सक्सेना की तरफ से हरीश साल्वे ने अपनी देल पेश की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले कभी संसद की क्षमता के खिलाफ नहीं रहे हैं। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ही अपना फैसला दे। वहीं दोनों पक्षों की मांग सुनने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस तरह DERC चेयरमैन नियुक्त नहीं कर सकते। हम इस अध्यादेश को संविधान पीठ के पास भेजे रहे हैं।

क्या है दिल्ली अध्यादेश

दिल्ली अध्यादेश मामले पर केंद्र की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री अरविंद केजरवाल के बीच विवाद चल रहा है। दरअसल इस अध्यादेश के तहतराजधानी दिल्ली में प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति का अधिकार उपराज्यपाल को दिया गया है।इस अध्यादेश के तहत केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी सिविल सर्विसेज अथॉरिटी का गठन किया है।

केंद्र सरकार ने इस अथॉरिटीमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में मुख्य सचिव और प्रधान गृह सचिव को सदस्य बनाया है। यह अथॉरिटी ही दिल्ली में अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का फैसला करेगी। वहीं किसी तरह का मतभेद या विवाद होने पर अफसरों के तबादले और नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसले का अधिकार उपराज्यपाल को दिया गया है।

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