नई दिल्ली: आज भारत समेत विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जा रहा है। नशा और इससे होने वाले प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 26 जून को इस दिन को मनाया जाता है।
वर्ल्ड ड्रग्स डे का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के इतिहास की बात करें तो इस दिन को मनाने के लिएयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 सितंबर, 1987 को एक प्रस्ताव पारित किया था।जिसमें कहा गया कि नशीली दवाओं के गैरकानूनी इस्तेमाल और अवैध तस्करी को रोकने और इसके प्रति लोगो में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाना जाना चाहिए। जिसके बाद 26 जून1989 को पहली बारअंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया गया। तब से हर साल 26 जून को यह दिन दुनियाभर के देशों में मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का महत्व
आज बड़े, बुजुर्गों समेत बच्चों में भी नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। कुछ लोग को नशा करने की ऐसी बुरी आदत लग जाती है कि वो इसके आगे कुछ भी नहीं सोच पाते। वो रात-दिन किसी ना किसी प्रकार के नशे में डूबे रहते हैं। नशे की बुरी लत से उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है। दुनियाभर में कई लोग नशे की लत के कारण अपनी जान भी गंवा देते हैं। इसलिए लोगो को जागरुक करना और नशे से होने वाली अनगिनत समस्याओं से अवगत करना बेहद जरूरी है।इसी के चलते अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का विशेष महत्व है।
वर्ल्ड ड्रग्स डे की थीम
हर साल अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस को मनाने के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है।इस साल इसकी थीम लोग पहले: कलंक और भेदभाव रोकें, रोकथाम को मजबूत करें रखी गई है। इसदिन लोगो को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में बताने के लिए जागरूकता अभियान कार्यक्रम चलाए जाते हैं।