शिमला: हिमाचल में स्कूलों में शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक का प्रयोग करने जा रही है। अब फिंगर प्रिंट से बच्चे के व्यवहार, व्यक्तित्व, कार्यकुशलता के साथ बौद्धिक क्षमता का विश्लेषण होगा। रिपोर्ट बताएगी कि बच्चे का आईक्यू लेवल कैसा है। किस फील्ड में वह अपना भविष्य बना सकता है।
सिरमौर के स्कूल से हुई शुरुआत
सिरमौर के हाई स्कूल नौरंगाबाद में इस तकनीक का सफल इस्तेमाल हुआ है। ये प्रदेश का ऐसा पहला सरकारी स्कूल है, जिसमें जापान की तकनीक को अपनाया गया है। इसका नाम ब्रेन बुक दिया है। डर्मेटोग्लिफिक्स यानी डीएमआईटी साफ्टवेयर से स्कूल में अब तक तीन बच्चों और दो शिक्षकों के टेस्ट लिए गए हैं।
जापान में है यह तकनीक
इस तकनीक को जापान के स्कूलों में अपनाया गया है। इस स्कूल के मुख्याध्यापक संजीव अत्री को भी एक बार जापान जाने का मौका मिला, जहां उन्होंने इस तकनीक के बारे में जाना। अब उन्होंने इस तकनीक का अपने स्कूल में सफल प्रयोग किया है।
यह दी गई जानकारी
मुख्याध्यापक संजीव अत्री ने बताया कि इस तकनीक विद्यार्थी के 39 विभिन्न गुणों की जानकारी प्रदान करती है। इस तकनीक का उन्होंने अहमदाबाद में विदेशी कंपनी से प्रशिक्षण लिया है। परीक्षण से यह भी पता लगाया जा सकता है कि विद्यार्थी किस तकनीक से सुगमता से सीख सकता है।