प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले नेक राम को मिला पदमश्री, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

मंडी: आज हिमाचल के लिए गर्व का दिन है। आह हिमाचल के किसान नेक राम शर्मा को पद्मश्री से अलंकृत किया गया है। बुधवार को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित दूसरे अलंकरण समारोह में वर्ष 2023 के लिए तीन पद्म विभूषण, पांच पद्म भूषण और सैंतालिस पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए गए। पहला अलंकरण समारोह 22 मार्च को आयोजित किया गया था। इस गरिमामई कार्यक्रम में हिमाचल के जिला मंडी के करसोग के रहने वाले नेकराम शर्मा को यह सम्मान दिया गया।

President Droupadi Murmu presents Padma Shri to Shri Nek Ram Sharma for Agriculture. A farmer and activist from Himachal Pradesh, he has motivated farmers to take up chemical free farming and adopt traditional seed varieties. pic.twitter.com/XD1GGXJUo9
President of India (@rashtrapatibhvn) April 5, 2023

इस कारण किया गया सम्मानित

कृषि क्षेत्र में मंडी जिला के करसोग क्षेत्र के नांज गांव से संबंध रखने वाले नेक राम शर्मा को पद्मश्री से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। नेक राम शर्मा जैविक खेती से जुड़े हैं और नौ-अनाज की पारंपरिक फसल प्रणाली को पुनर्जीवित कर रहे हैं। #PresidentOfIndia pic.twitter.com/wZzc26JnOF
Sukhvinder Singh Sukhu (@SukhuSukhvinder) April 5, 2023

सिर्फ दसवीं क्लास तक पढ़े नेक राम शर्मा को प्राकृतिक खेती की नेक सोच से पहचान मिली। 30 साल पहले 1993 में उन्होंने बिना केमिकल के प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। नेकराम शर्मा के लिए प्राकृतिक खेती का सफर आसान नहीं था।

प्राकृतिक खेती के लिए जाने जाते हैं नेक राम

हर्ष का विषय है कि हमारे हिमाचल के करसोग निवासी नेक राम जी को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है।

नेक राम जी को यह सम्मान रसायन मुक्त खेती करने और पारंपरिक बीज किस्मों को अपनाने हेतु प्रेरित करने के लिए मिला है। pic.twitter.com/4OgpLOd3M1
Jairam Thakur (@jairamthakurbjp) April 6, 2023

आज उनके गांव के आसपास सिर्फ गोबर की मदद से किसान खेती करते हैं। 59 वर्षीय किसान नेकराम शर्मा ने सरकारी नौकरी को अनदेखा कर धरती मां को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। प्राकृतिक खेती बीमारियों को दूर रखने में भी सहायक सिद्ध होती है।

यह है ध्येय

नेकराम शर्मा की प्राकृतिक सब्जियों की डिमांड हिमाचल प्रदेश से लेकर राजधानी दिल्ली तक है। 1 मई 1964 को जन्मे नेकराम शर्मा ने सिर्फ मैट्रिक तक की पढ़ाई की है। मिट्टी के लिए कुछ कर गुजरने की मंशा हमेशा उन्हें प्रेरणा देने का काम करती रही। नेकराम शर्मा ने किसानों को केमिकल खेती की ओर बढ़ते देखकर ठान लिया कि इस खेती से छुटकारा दिलाना है।

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