नई दिल्ली: दिल्ली में विवादों में घिरे जेल मंत्री सत्येंद्र जैन और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों पिछले कुछ दिनों से भारी विवाद में फंसे हुए हैं। सत्येंद्र जैन तो लम्बे समय से जेल में बंद हैं। ऐसे में कई सवाल हैं जो सामने आ रहे हैं।
एक साथ दोनों का इस्तीफा
इन दोनों ने एक साथ इस्तीफा दिया है। ऐसे में दिल्ली सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल उठते हैं। क्या सत्येंद्र जैन इतने लम्बे समय से जेल में बंद हैं तो क्या सीएम को पहले नहीं दोनों का इस्तीफा ले लेना चाहिए था और जो अब तक जेल के अंदर बैठकर फैसले ले रहे थे उस पर जवाबदेही की जिम्मेदारी किसकी है।
इस्तीफा तुरंत स्वीकार किया गया
इस मामले में यह भी सवाल है कि कुछ घंटे पहले दिया गया इस्तीफा कुछ समय में ही स्वीकार कर लिया गया। अगर एक दम से इस्तीफा स्वीकार किया गया तो जाहिर है यह अरविन्द केजरीवाल ने इस्तीफा मांगा होगा। क्योंकि अगर इसे तुरंत स्वीकार करना था तो जब सत्येंद्र जैन को जेल भेजा गया तो भी उनको मंत्री पद से क्यों नहीं हटाया गया।
सीबीआई ने 15 को बनाया आरोपी
15 आरोपियों के खिलाफ कतिथ आबकारी घोटाले में FIR दर्ज की गई जिसमें दिल्ली के डिप्टी सीएम और आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया का नाम भी था। इस पॉलिसी को तैयार करने और उसके क्रियान्वयन के पीछे मकसद था शराब कारोबारी और लाईसेंसधारियों को गलत तरीके से लाभ पहुँचाना।
जानबूझ कर पहुँचाया गया फायदा
GOM यानी ग्रुप ऑफ मेंमबर का सदस्य होने के साथ साथ आबकारी मंत्री होने के बावजूद मनीष सिसोदिया ने इस पॉलिसी को लेकर बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट, आम जनता के हितों को तांक पर रखकर कैबिनेट नोट में कुछ बदलाव किए यानी हेरफेर की गयी जिसका सीधा मकसद शराब कारोबारियों को फायदा पहुँचाना था।
जांच के दौरान यह आया सामने
जांच के दौरान सामने आया कि मनीष सिसोदिया ने अक्टूबर 2021 से सितंबर 2022 तक 14 मोबाइल फोन और 4 सिम कार्ड बदले। ये मोबाइल बदलने का मकसद सुबूतों को नष्ट करने का था। इसी के चलते सीबीआई में मनीष सिसोदिया के सेक्रेटरी देवेंद्र शर्मा के बयान भी दर्ज किए थे क्योंकि उसी ने मोबाइल और सिम कार्ड प्रोवाइड करवाए थे।