Haryana Surajkund Mela: धूमधाम से हुआ 36 वें सूरजकुंड मेला का आगाज..इस बार की थीम है उत्तर पूर्व

चंडीगढ़- कोरोना के बाद की संभली परिस्थिती में दो साल बाद ही सही एक बार फिर से सूरजकुंड का एति​हासिक मेला क्षेत्र गुलजार है। मेले की शुरूआत हो चुकी है और खुद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल ने किया। यह मेला 3 फरवरी से शुरू होकर 19 फरवरी तक चलेगा।

भारत में मेलेठेले की परंपरा रही है। लेकिन समय के परंपरागत मेले का स्वरूप या तो खत्म हो रहा है या फिर सिमटता जा रहा है और पश्चिमीकरण और हावी होते बाजार वाद के इस दौर में आज की युवा पीढ़ि को मेले की बजाय मॉल की रौनक भाने लगी है। लेकिन बावजूद इसके हरित प्रदेश हरियाणा में प्रत्येक वर्ष नियत समय पर आयोजित होने वाला सूरजकुंड मेला आम जन को भारत की संस्कृति और रीति-रिवाजों से अवगत करवाता है। बड़ी बात यह है कि सूरजकुंड मेले में भारत के अलग-अलग राज्यों से आए शिल्पकारी अपने-अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते है। यह मेला हर रोज सुबह 10 बजे से शुरू होकर रात 8:30 बजे तक चलेगा।

सूरजकुंड मेले की थीम

हर साल आयोजित होने वाले सूरजकुंड मेले की थीम भी प्रत्येक वर्ष अलग-अलग होती है। इस साल सूरजकुंड मेले की थीम नॉर्थ ईस्ट रीजन रखी गई है। जिसमें देश के आठ राज्य असम, अरूणाचल, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम सहभागी होंगे। इसी के साथ मेले में मेले में शंघाई संगठन से जुड़े कई देश भी पार्टनर कंट्री के रूप में सहभागी बनेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब एससीओ से जुड़े कई देश एक साथ पार्टनर कंट्री और उत्तर पूर्व के कई राज्य थीम स्टेट के रूप में मेले के साक्षी होंगे। सूरजकुंड मेला देखने आए लोग इन राज्यों की संस्कृति और खान-पान का लुफ्त उठा पाएंगे।

सूरजकुंड मेले की खासियत

इस बार के सूरजकुंड मेले की सबसे पहली खासियत यह है कि इस मेले में पहली बार 45 देशों से विदेशी कलाकार इस मेले में हिस्सा लेंगे। जो कि पिछली बार के मुकाबले दोगुनी है। मेले में फूड्स के लिए 50 स्टॉल लगाई जाएंगी। जिसके चलते मेले में कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का लाभ उठाया जा सकता है।

सूरजकुंड मेले का इतिहास

हरियाणा पर्यटन विभाग की ओर से पहली बार वर्ष 1987 में सूरजकुंड मेले की शुरूआत की गई थी। यह मेला भारत भर के हजारों शिल्पकारों को अपनी कला और उत्पादों को व्यापक दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने में मदद करता है। इस प्रकार के मेले भारत के विरासत शिल्प को पुनर्जीवित करने में विशेष भूमिका निभाते है।

सूरजकुंड मेले की टिकट ऑनलाइन भी ले सकेंगे पर्यटक

मेला परिसर में पर्यटकों का प्रवेश आसान बनाने के लिए इस बार मेले की टिकट ऑनलाइन भी खरीद सकते है। वही ऑनलाइन टिकट लेने पर लोगों को दस प्रतिशत की छूट भी मिलेगी। वहीं लोगों को मेला परिसर तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा विशेष बसे भी चलाई जा रही है।

अभी तो मेले की शुरूआत हुई है और दर्शकों की भारी भीड़ देखी जा रही है लेकिन जैसेजैसे दिन गुजरेगा मेले की रौनक और बढ़ेगी और मेला प्रेमियों की भीड़ भी।

Content By- Vanita

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