श्रीनगर: यूँ तो सभी जानते हैं कि कश्मीर के युवा सेना या सीआरपीएफ ने जाना नहीं चाहते हैं लेकिन धारा 370 हटने के बाद घाटी की फिजाओं में बदलाव देखने को मिल रहा है। अब जो वाक्या हम आपको बताने जा रहे हैं वो उस सीआरपीएफ के जवान का है जिसने अपनी जान की परवाह न करते हुए 3 आतंकियों को ढेर किया था।
25 मई को हुए थे शहीद
इनमें से एक नाम जम्मू कश्मीर पुलिस के कॉन्स्टेबल मुदासिर अहमद शेख का भी है। मुदासिर अहमद शेख आतंकवादियों का मुकाबला करते हुए असाधारण वीरता प्रदर्शन के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। मुदासिर अहमद शेख बारामूला में 25 मई 2022 को आतंकियों से लोहा लेते वक्त शहीद हो गए थे।
3 आतंकियों को किया था ढेर
25 मई 2022 को सुरक्षाबलों को तीन विदेशी आतंकियों के होने की जानकारी मिली। इसके बाद सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन चलाया। आतंकियों के निशाने पर अमरनाथ यात्रा थी। मुदासिर अहमद शेख ने आतंकियों के वाहन की पहचान की। लेकिन आतंकी खतरा देखकर फायरिंग करने लगे।
नहीं की जान की परवाह
मुदासिर अहमद शेख अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकियों के वाहन पर छपटे और एक आतंकी को कार से बाहर खींच लिया। इसके बाद बाकी आतंकियों ने उनपर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इससे मुदासिर अहमद शेख गंभीर रूप से जख्मी हो गए। इसके बावजूद वे एक हाथ से आतंकी को पकड़े रहे और आतंकियों से सामने से लड़ाई की और जवाब में ताबड़तोड़ फायरिंग की।
अदम्य साहस का दिया परिचय
मुदासिर अहमद शेख काफी जख्मी हो गए थे. इसके बाद वे शहीद हो गए। लेकिन इस ऑपरेशन में 3 आतंकियों को ढेर कर दिया और भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। सुरक्षाबलों ने बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया। मुदासिर अहमद को बेजोड़ साहस, वीरता और शौर्य के लिए शौर्य चक्र से मरणोप्रांत सम्मानित किया गया है।
बेटे पर परिजनों को है गर्व
मुदासिर अहमद शेख के अंतिम संस्कार के वक्त पिता मकसूद अहमद ने कहा था, बेटे मुदासिर की कुर्बानी से वजह से हजारों आदमियों की जान बच गई। हमें पता है कि वह अब कभी वापस नहीं आएगा। हमें और हमारी बिरादरी को फक्र है कि लड़ते-लड़ते बेटे ने जान दे दी, लेकिन आतंकियों को बचने नहीं दिया।