यरूशलम: विश्व के आठवें सबसे शक्तिशाली देश इजराइल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आते ही इजराइल की शिक्षा निति में बदलाब करने के संकेत जारी कर दिए हैं। नेतन्याहू एक देश के प्रति कट्टरपंथी यहूदी सोच के माने जाते हैं। नेतन्याहू ने मंत्रालयों का बंटवारा इसी आधार पर किया है कि यहूदी विचारधारा को किस तरह से और कट्टर बनाया जा सकता है। प्रमुख मंत्रालयों की जिम्मेदारी उन लोगों को दी गई है, जो कट्टरवादी हैं और आधुनिकता से कोसों दूर हैं।
राष्ट्रीय मिशन मंत्रालय का किया निर्माण
सरकार ने राष्ट्रीय मिशन मंत्रालय के नाम से एक नया मंत्रालय बनाया है। ये मंत्रालय देखेगा कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में यहूदी समर्थित इतिहास बताया जाए, उनके खिलाफ कुछ भी न पढ़ाया जाए। पहले प्री-प्राइमरी कक्षाओं का सिलेबस शिक्षा मंत्रालय तय करता था।
विरोधियों ने दिया यहूदीवादी मंत्रालय का नाम
विरोधियों का कहना है कि ये नया मंत्रालय यहूदीवादी मंत्रालय है। राष्ट्रीय मिशन मंत्रालय का नेतृत्व कट्टरवादी दक्षिणपंथी नेता ओरिट स्ट्रोक करेंगी। इसी तरह से हेरिटेज मंत्रालय भी दक्षिणपंथी नेता अमिहाई एलियाहू को सौंपा गया है। गैर-यहूदियों का कहना है कि इस मंत्रालय में रहते हुए इतिहास को पलटने की कोशिश की जायेगी।
मंत्री के मस्जिद दौरे को लेकर हुआ विवाद
इजराइल के धुर दक्षिणपंथी नेता और देश के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने अल-अक्सा मस्जिद का दौरा किया है। इस क्षेत्र में अभी यहूदियों का सीमित प्रवेश है। इजराइली मंत्री के जाने से तनाव बढ़ गया है। दरअसल, यहूदियों का कहना है कि जिस जगह पर आज अल-अक्सा मस्जिद है, वह यहूदियों की पवित्र जगह है, जिसे एक समुदाय ने खंडित करके मस्जिद बना ली थी।