नई दिल्ली: आज दिल्ली में होने वाले नगर निगम चुनाव का प्रचार थम गया है। इस एमसीडी चुनाव के लिए मुकाबला त्रिकोणीय जरूर है लेकिन मुख्य लड़ाई भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच दिखाई दे रही है। बावजूद इसके राजनीति में उंट किस करवट बैठेगा और किसकी होगी जीत और किसकी होगी हार ये सब जनता जर्नादन को तय करना है और चुनाव परिणामों के जरिए ही तय होना है। 4 दिसंबर को एमसीडी के लिए मतदान होना है और नतीजे 7 दिसंबर को आएंगे।
पिछले 15 सालों से भाजपा है काबिज
एमसीडी पर पिछले 15 वर्षों से बीजेपी काबिज है ऐसे में वो अपना वर्चस्व को कायम रखने के लिए पूरा जोर लगाएगी। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता के साथ-साथ नगर निगम को भाजपा से छीनना चाहती है। वहीं कांग्रेस दिल्ली की सियासत अपने आप को बचाने की कोशिश में लगी है।
कितने उम्मीदवारों का भविष्य होगा दाव पर
दिल्ली एमसीडी चुनाव में 250 पार्षद सीटों के लिए 1349 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से 382 निर्दलीय प्रत्याशी हैं। बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सभी 250 सीटों पर अपने-अपने कैंडिडेट उतारे हैं, जबकि कांग्रेस के 247 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे रहे हैं। जेडीयू 23 तो एआईएमईआईएम ने 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। बसपा ने 174, इंडियन मुस्लिम लीग ने 12, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 3, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने चार, एनसीपी ने 29 और सपा, लोक जनशक्ति पार्टी ने एक-एक सीट पर प्रत्याशी मैदान में उतारा है।
भाजपा और आप में सीधी है लड़ाई
केजरीवाल का दावा है कि उनकी पार्टी एमसीडी जीतती है तो वो विदेश से एक्सपर्ट बुलाकर दिल्ली के कूड़े के तीनों ढेरों को एक साल में समाप्त करेगी। वहीं, बीजेपी एमसीडी को फंड न देने के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार को घेरती है।