हरियाणा में मेडिकल बांड पॉलिसी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार शाम को लगभग 5 घंटे से ज्यादा सीएम मनोहर लाल और मेडिकल स्टूडेंट के बीच बैठक हुई लेकिन सहमती के कोई आसार बनते हुए नहीं दिखा। एक तरफ सरकार की तरफ से कहा गया कि ज्यादातर छात्र सरकार के प्रस्ताव से सहमत हैं वहीं मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद बाहर आये छात्रों ने साफगोई से कहा कि अभी सहमती नहीं बनी है। हालांकि उन्होने यह स्वीकार किया कि सरकार की तरफ से कुछ प्रस्ताव आये हैं जिसपर छात्रों के बीच बैठक में आम राय बनाई जाएगी।
छात्र क्यों कर रहे हैं बांड पॉलिसी का विरोध
छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस की सालाना फीस 52 हजार है, जो कि सरकार ने अब सीधी 10 लाख कर दी है। मीडिया से बातचीत में छात्रों ने कहा कि सरकार तर्क दे रही है कि यह बॉन्ड पॉलिसी इसलिए बनाई गई है क्योंकि डॉक्टर की कमी है, और छात्र इससे बंधे रहे। उनका कहना है कि सरकार हमें जॉब्स सिक्योरिटी देने के लिए तैयार नहीं है, इसके उलट हमें बांड के दायरे में बांधा जा रहा है। छात्रों ने दावा कि यदि सरकार उन्हें नौकरी की गारंटी दे तो वे सरकार की कुछ शर्तों को मानने को तैयार हैं।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने क्या कहा
बैठक के बाद सीएम मनोहर लाल ने कहा कि बांड की समय सीमा 7 साल से घटाकर 5 साल कर दी गई है। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि एक वर्ष के भीतर छात्रों को अनुबंध स्तर की नौकरियां भी दी जाएंगी। बांड नीति को लेकर एमबीबीएस छात्रों के साथ मुख्यमंत्री की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हमारे डॉक्टरों को सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को एक साल के भीतर अनुबंध स्तर की नौकरियां मिल जाएंगी।
यह है हरियाणा में डॉक्टरों की हालत
छात्रों का कहना है कि अगर सच में ही डॉक्टरों की कमी है तो फिर वह छात्रों को नौकरी देने के लिए तैयार क्यों नहीं होती है। वे कहते हैं कि हरियाणा और देश में 11 हजार मरीजों पर एक डॉक्टर है, जबकि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार एक हजार लोगों पर एक डॉक्टर होना आवश्यक है।