अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए मोदी सरकार तेल कंपनियों के पास फैला रही हाथ

देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है। सरकार कोशिश को कर रही कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधार जाये, लेकिन उनके प्रयास असफल हो जाती है। वहीँ केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों से 19,000 करोड़ रुपये की डिविडेंड (लाभांश) मांग की है।

लाभांश किसी कंपनी के लाभ में भागीदारों का अंश होता है जो वह कंपनी लाभ कमाने पर अपने शेयरधारकों को देती है। किसी ज्वाइंट स्टॉक कंपनी में लाभांश, शेयरों के निश्चित मूल्य के आधार पर मिलता है। इस मामले में शेयरधारक उसके शेयर के अनुपात में डिविडेंड ग्रहण करता है। डिविडेंड पैसे, शेयर या अन्य कई रूपों में दिया जा सकता है। लेकिन अब केंद्र सरकार तेल कंपनियों से डिविडेंड यानि लाभांश के तौर पर 19 हजार करोड़ रुपये की मांग कर रही है। वहीँ केंद्र सरकार ने तेल कंपनी ONGC और इंडियन ऑयल से इस कुल रकम में से करीब 60 फीसदी यानी 11 हजार करोड़ रुपये और अधिक राशि देने की बात कही गयी है।

वहीँ सूत्रों की माने तो ONGC को करीब 6,500 करोड़ रुपये, इंडियन ऑयल को 5,500 करोड़, BPCL को 2,500 करोड़, GAIL को 2,000 करोड़, ऑयल इंडिया को 1,500 करोड़ और इंजीनियर्स इंडिया को 1,000 करोड़ रुपये बतौर लाभांश सरकार को देना पड़ सकता है।

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