सरकार अपना पहला सॅावरेन बॉन्ड करेगी जारी, स्वदेशी जागरण मंच ने किया विरोध

बीजेपी सरकार की दूसरी पारी के पहले बजट में 5 साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का महत्वूर्ण उद्देश्य रखा गया है. वित्तमंत्री निर्मला सीतरमण ने बजट में इस उद्देश्य की घोषणा करते हुए कहा कि इसके लिए विकास योजनाओं पर कई लाख करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे और सॅावरेन बांड जारी कर विदेश से क़र्ज़ लिया जायेगा. लेकिन राष्ट्रीय संघ सेवक से जुडी संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने विदेशी क़र्ज़ लेने के सरकार के प्रस्ताव का विरोध इसे देश के अहित में बताया है.

देश को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में एक लाख करोड़ रूपये के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है. बजट में वित्तमंत्री ने विदेश से कर्ज़ और अन्य तरीके से धन एकत्र करने के साथ-साथ इस वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में अपना पहला सॅावरेन बांड ज़ारी करने का भी संकेत दिया है.

स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) का कहना है की विदेश से क़र्ज़ लेना देशहित के खिलाफ है और इससे अर्थव्यवस्था को लम्बे समय तक का जोखिम उठाना पड़ सकता है इससे विकसित देश और उनकी संस्थाएं हमारे देश की नीतियों के निर्धारण में दखल दे सकती है. एसजेएम के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने कहा कि उनका संगठन इसका विरोध करेगा और इस निर्णय के लिए देश के प्रभावशाली अर्थशास्त्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी. महाजन ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से कहा, हम इसे नहीं होने देंगे. हमे पूरा भरोसा है कि सरकार इन बांड को लाने के लिए अपने निर्णय को वापस लेंगी.

उन्होंने अर्जेंटीना और टर्की का उदहारण देते हुए कहा, जिन्होंने अपने सरकारी घाटे की भरपाई के लिए अंतर्राष्ट्रिय बाजारों से लोन लिया है. उन देशो का अभी तक का अनुभव अच्छा नहीं रहा है. महाजन ने कहा कि विदेश से क़र्ज़ लेने का मतलब है कि रूपये का अवमूल्यन तेज़ी से होगा और विदेशी सरकारें टैरिफ में कटौती का दवाब बनाएंगी.

भारत सरकार की इस घोषणा के बाद कई देश अपने लिए अच्छी सम्भावना देख रहे है. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेजा मे ने हाल में लंदन में कहा था कि उन्हें इस बात की उम्मीद है कि भारत सरकार अपना पहला सॅावरेन बांड लंदन से जारी करेंगी.

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