BMC देश के सबसे अमीर नगर पालिका है लेकिन नालियां और गढ्डे को लेकर कोई नीति नहीं

बीएमसी मुंबई की सबसे मूलभूत समस्या का समाधान निकालने में असमर्थ है जिससे राहगीरों की सुरक्षा पर हमेशा एक खतरा बना रहता है. शहर में 260 किमी बड़े और 465 किमी छोटे नाले हैं. इनके अलावा कई सौ किलोमीटर लंबी सड़कों के किनारे नालियां हैं. आइलैंड सिटी में ज्यादातर नाले ढके हुए हैं और सड़क के बीच से निकलते हैं जबकि उपनगर में ये खुले हैं और सड़क के किनारे फुटपाथ के पास से निकलते हैं.

मुम्बई मे नाले सबसे खतरनाक होते हैं क्योंकि वहां चलते वक्त हमेशा इन पर नजर रखनी पड़ती है. पुराने हादसों से भी बीएमसी ने कुछ नहीं सीखा है. अगस्त 2017 में भारी बारिश के दौरान कमर तक भरे पानी में चल रहे सीनियर गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट डॉ. दीपक अमरापुरकर लोउर परेल के एक खुले हुए मैनहोल में गिर गए थे. उनका शव दो दिन बाद वर्ली के पास मिला था.

अधिकारियों का कहना है कि नालियों को ढके रखने को लेकर कोई नीति नहीं है। लेकिन, नालों को ढका जाता है ताकि उनके ऊपर फुटपाथ बन सके और लोग उसमें कचरा डालकर उसे जाम न कर सकें. एक अधिकारी ने बताया कि नाले को ढकने से दो तरह की परेशानियां होती हैं. एक तो उसे साफ करना मुश्किल हो जाता है और दूसरा भारी बारिश के दौरान पानी को निकालना मुश्किल हो जाता है. करीब चार महीने पहले बीएमसी प्रशासन ने पॉलीकार्बोनेटशीट से नालों को ढकने का प्रस्ताव बनाया था ताकि लोग उससे कचरा न फेंक सकें लेकिन स्टैंडिंग कमिटी को वह सही नहीं लगा. प्रशासन से बेहतर प्लान बनाने के लिए कहा गया है लेकिन उस पर काम शुरू नहीं हुआ है.

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