मोदी राज 2.0 में मिला EMI का तोहफा, RBI ने कम किया रेपो रेट

मोदी सरकार के कार्यकाल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोगों को बड़ा तोहफा दिया है. एक बार फिर रेपो रेट में कटौती की गई है. आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक में 0.25 बेस प्वाइंट की कटौती हुई है.

पीएम मोदी सरकार के कार्यकाल में आज पहली मौद्रिक समीक्षा बैठक थी.पिछली दो बैठकों में भी एमपीसी रेपो रेट में क्रमश: 0.25 फीसदी की कटौती कर चुकी है. रिजर्व बैंक के इतिहास में पहली बार है जब आरबीआई गवर्नर की नियुक्तिस के बाद लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कमी आई है.

आपको क्या मिलेगा फायदा ?

दरअसल इससे बैंकों पर ब्याआज दर कम करने का दबाव बनेगा. ब्यादज दर कम होने की स्थिति में उन लोगों को फायदा मिलेगा जिनकी होम या ऑटो लोन की ईएमआई चल रही है.इसके अलावा बैंक से नए लोन लेने की स्थिति में भी पहले के मुकाबले ज्याोदा राहत मिलेगी.

आरटीजीएस और एनईएफटी पर लगने वाले चार्ज खत्म

क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने आरटीजीएस और एनईएफटी पर लगने वाले चार्ज खत्म करने का फैसला किया है. आरबीआई ने बैंकों को कहा है कि इनका फायदा ग्राहकों को देना सुनिश्चित करें. इतना ही नहीं बैठक में एटीएम इंटरचेंज चार्ज (एक बैंक का एटीएम दूसरे में इस्तेमाल ) को लेकर एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसका नेतृत्व आईबीए के सीईओ करेंगे. वहीं, एटीएम चार्ज फीस को लेकर निर्णय किया जाएगा. अपनी पहली मीटिंग के दो महीने के अंदर कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौपनी होगी.

आर्थिक वृद्धि दर पांच साल के निचले स्तर पर

बता दें कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहली मोनेटरी पालिसी समीक्षा है. बता दें कि मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ग्रोथ रेट घटकर 5.8 फीसदी पर आ गई है जो 5 साल में सबसे कम है. मुद्रास्फीति हालांकि अप्रैल में बढ़कर 2.92 फीसदी हो गई है. जानकारों का कहना है कि 2018-19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई, जिसके मद्देनजर रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ गई थी.

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