करतारपुर कारीडोर निर्माण को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच आज बहुप्रतीक्षित बैठक

करतारपुर कारीडोर निर्माण को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित बैठक अटारी में आज होने जा रही है. बता दें कि विदेश मंत्रालय के अगुवाई में भारतीय दल बैठक की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है. वहीं पाकिस्तान की तरफ से जिस तरह से इस कारीडोर के निर्माण को लेकर तेजी दिखाई जा रही है. उसे देखते हुए पूरी उम्मीद है कि अक्टूबर, 2019 तक ये तैयार हो जाएगा.

लेकिन भारत की सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस कारीडोर को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आइएसआइ की बुरी नजर से किस तरह से बचाया जाए. पाकिस्तान के साथ होने वाली पहली वार्ता में ही भारत इस बात को बेहद गंभीरता से उठाएगा कि करतारपुर कारीडोर में किसी तरह का प्रोपगंडा नहीं होनी चाहिए. ये कॉरिडोर धार्मिक आस्था के मद्देनजर खोला जा रहा है तो इसमें ऐसी कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए जिससे धार्मिक आस्था आहत न हो.

सरहद पर तल्खी के बीच भारत और पाकिस्तान के अधिकारी आज अटारी बॉर्डर पर बैठक करेंगे. पाकिस्तान में मौजूद करतापुर साहिब गुरुद्वारे को लेकर दोनों देशों के बीच बैठक होगी. करतारपुर गलियारे के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने, कॉरिडोर बनाने के लिए ये बैठक हो रही है.

भारतीय पक्ष पाकिस्तान में सिख धार्मिक स्थानों पर भारत-विरोधी और खालिस्तानी अगलाववादी दुष्प्रचार का भी मुद्दा उठाएगा. भारत सुनिश्चित करेगा कि पाकिस्तान करतारपुर गुरुद्वारे में अलगाववाद की गतिविधियों की इजाजत नहीं देगा. भारत की तरफ से इस दल में विदेश, सड़क परिवहन, बीसएफ, राजमार्ग प्राधिकरण समेत कई मंत्रालयों के अधिकारी होंगे.

करतापुर कॉरिडोर बनने से सिखों का 70 साल लंबा इंतजार खत्म होगा. सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव ने करतारपुर साहिब में अपने जीवन के 18 साल बिताए थे. सिख तीर्थयात्री करतारपुर में रावी नदी के तट पर प्रतिष्ठित गुरुद्वारा दरबार साहिब का दौरा करने में सक्षम होंगे.

सिख श्रद्धालुओं को बिना वीजा के पाकिस्तान में एंट्री मिलेगी, सिर्फ टिकट लेना होगा. करतारपुर साहिब गलियारे के निर्माण की मांग भारत दो दशक से करता आ रहा है, जहां गुरुनानक का निधन 1539 में हुआ था. यह धार्मिक स्थल भारतीय सीमा से दिखाई पड़ता है.

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