लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस उत्तर प्रदेश में नई रणनीति पर काम कर रही है. राज्य में लोकसभा की 80 सीटें हैं, लेकिन पार्टी उन 26 सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां उसकी जीत की संभावनाएं ज्यादा हैं. ये वो सीटें हैं जो कांग्रेस का मजबूत गढ रही हैं या जहां पिछले चुनावों में पार्टी जीत चुकी है.
कांग्रेस यूपी में मुकाबले के लिए तैयार हो रही है. लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजने वाले इस राज्य में पार्टी सभी 80 सीटों पर अपनी ताकत नहीं लगाएगी. इसकी बजाय उन 26 सीटों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जहां उसकी जीत की संभावना ज्यादा है. ये वो सीटें हैं जहां 2014 में पार्टी को जीत मिली थी या वह दूसरे स्थान पर रही थी.
पार्टी के फोकस वाली सीटों में अमेठी और रायबरेली शामिल हैं जो गांधी परिवार का गढ हैं. सुल्तानपुर सीट पर भी कांग्रेस मजबूत है. इसके अलावा वह उन 23 सीटों पर भी मजबूती से लड़ेगी जहां 2009 में उसे जीत मिली थी.
सपा-बसपा के गठबंधन के बाद कांग्रेस ने प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को यूपी की कमान सौंपी है. इन दोनों नेताओं ने पिछले सप्ताह राज्य में कार्यकर्ताओं के साथ मैराथन बैठक की थी. कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका के प्रभाव से पार्टी को यूपी में अपना खोया जनाधार वापस पाने में मदद मिलेगी, लेकिन फिलहाल वह अपने लक्ष्य ज्यादा बड़े नहीं रखना चाहती. यही कारण है कि पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है.