Loksabha Chunav 2024: बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने बंगाल की ममता सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि उन निर्वाचन क्षेत्रों में लोकसभा का चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं है, जहां पर सांप्रदायिक हिंसा देखी गई। मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणम की अध्यक्षता वाली पीठ की यह टिप्पणी 17 अप्रैल को रामनवमी जुलूस के दौरान मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर सुनवाई के दौरान आई।
कोर्ट ने कहा कि अगर लोग शांति और सद्भाव के साथ नहीं रह सकते हैं, तो हम कहेंगे कि चुनाव आयोग इन जिलों में संसदीय चुनाव नहीं करा सकता है। यही एकमात्र तरीका है। आचार सहिंता लागू होने के बावजूद अगर लोगों के दो समूह इस तरह लड़ रहे हैं तो वे किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधियों के लायक नहीं हैं। ऐसे लोगों को वोट डालने के अधिकार से वंचित रखना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में चुनाव 7 मई और 13 मई को होने हैं। हम कहेंगे कि चुनाव कराने ही नहीं चाहिए। चुनाव का क्या फायदा? कोलकाता में भी 23 स्थान ऐसे हैं, जहां पर रामनवमी के दिन जश्न मनाया गया लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। अगर आचार सहिंता लागू होने पर ऐसा हो रहा है, तो राज्य पुलिस क्या करती है? केंद्रीय बल क्या कर रहे हैं?
यह दोनों बल मिलकर भी हिंसा को नहीं रोक सकते हैं तो फिर प्रदेश की कानून व्यवस्था को कौन संभालेगा। राज्य सरकार ने अभी तक नहीं बताया है कि कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कितने लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि सीआईडी ने अब जांच अपने हाथों में ले ली है।
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वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि हमारा प्रस्ताव है कि हम भारत के चुनाव आयोग को एक सिफारिश करेंगे कि जो लोग शांति से जश्न नहीं मना सकते, उन्हें चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हम चुनाव आयोग को प्रस्ताव देंगे कि बरहामपुर (मुर्शिदाबाद क्षेत्र) में चुनाव टाल दिया जाए। दोनों पक्षों की यह असहिष्णुता अस्वीकार्य है। हाईकोर्ट ने हिंसा पर रिपोर्ट मांगी है। चुनाव रोकने के संबंध में अभी तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। अब मामले में शुक्रवार को आगे की सुनवाई होगी।