संतोष कुमार सिंह
पटना: विगत कुछ महीनों से बिहार में एक अधिकारी सर्वाधिक चर्चा में हैं वो हैं के के पाठक। कभी उनके इस्तीफे की खबरें आती हैं तो कभी छुट्टी पर जाने की। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कह दिया है कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक एक ईमानदार अधिकारी हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि के के पाठक ईमानदार अधिकारी हैं तो फिर विपक्ष इतना आगबबूला क्यों है? क्यों विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है और नीतीश कुमार मुर्दाबाद के नारे लगा रहा है। दरअसल ये सब हो रहा है के के पाठक के उस आदेश की वजह से जिसमें अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि स्कूल 9 बजे से 5 बजे तक खुलेंगे।
के के पाठक के साथ हैं नीतीश
सीएम नीतीश कुमार ने केके पाठक का सपोर्ट करते हुए कहा कि शिक्षकों को छात्रों के स्कूल आने से 15 मिनट पहले आना होगा। साथ ही छात्रों के जाने के 15 मिनट बाद ही स्कूल से जाना होगा। विपक्ष की शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक के तबादले की मांग को नकारते हुए सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें ईमानदार अधिकारी बताया।
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इस्तीफा अफवाह यह हकीकत
इसके बाद बिहार में के के पाठक के इस्तीफे की सुर्खियां मीडिया में बनने लगी। कहा जाने लगा के के पाठक ने इस्तीफा दे दिया है। अब सवाल ये कि केके पाठक के इस्तीफे की खबर अफवाह क्यों न माना जाये। दरअसल अभी तक इसको लेकर कोई भी नोटिफिकेशन यानी अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जबकि आमतौर पर ऐसे किसी भी मामले में अधिसूचना जारी करने का प्रावधान है। जबकी इस बाबत कोई अधिसूचना सरकार की तरफ से जारी नहीं की गई है।
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