भारत का राष्ट्रीय पर्व होली के पावन मौके पर मथुरा की अनूठी लठमार होली का नजारा देखने लायक होती है जब नंदगाव के हुरियारों पर उनकी हुरियारिन प्रेम भरी लाठिया बरसाती हैं.
दरअसल, ये हुरियारिनें बरसाना के ब्राह्मण समाज की बहुएं होती हैं, जो किशोरीजी की सहचरी के रूप में नंदलाला और उनके ग्वाल-वालों के साथ होली खेलकर इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन करती हैं.
आश्चर्य यह कि वर्षभर अपने घरों में सामान्य रूप में रहने वाली इन हुरियारिनों में होली के समय असाधारण व आलौकिक तेज़आ जाता है. ये हुरियारिनें अपने हाथों में तेल से नहाई चमचमाती लाठियां लेकर हुरियारों पर बरस पड़ती हैं.
हुरियारे भी अपनी ढालो पर लाठी के वार बड़े ही प्यार से सहन करते हुए नाचते हैं. लोकगीत गाते हुए होली की तैयारियां शुरू की जाती हैं. होली खेलते समय सिर्फ राधा रानी व श्रीकृष्ण को अंतर मन में याद करते हैं