जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से आतंकी गतिविधियों की आशंका के मद्देनजर चौकसी बढ़ा दी गई है.इसके साथ साथ अलगाववादियों पर लगाम कसने की प्रक्रिया और तेज हो गई है. इस कड़ी में श्रीनगर में शुक्रवार रात जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को हिरासत में ले लिया गया है. वहीं शनिवार सुबह लाल चौक पर तिरंगा फहराने गए अकाली दल के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है.
इस तरह नेताओं को हिरासत में लेने से भड़की पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर अपना गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने ट्वीट किया है कि पिछले 24 घंटे में हुर्रियत नेताओं और जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है. मनमाने तरीके से उठाया गया ये कदम जम्मू-कश्मीर में मुद्दों को उलझा देगा. किस बिनाह पर नेताओं की गिरफ्तारी हुई? आप किसी शख्स को कैद कर सकते हो, उसके विचारों को नहीं.
Gov seems to be on an arrest spree. Just a word of caution. Large scale arrests took place in 1990. Leaders were ferried to Jodhpur and many jails across the country. Things worsened. This is a tried tested and failed model. Please desist from it. It wont work.Things will worsen
Sajad Lone (@sajadlone) February 23, 2019
महबूबा के साथ साथ जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कान्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन पर भी सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने ट्वीट कर के कहा है कि लगता है सरकार गिरफ्तारी का फायदा उठाना चाहती है, लेकिन सावधान हो जाएं क्योंकि 1990 में भी बड़ी तादाद में गिरफ्तारियां हुई थीं, नेताओं को जोधपुर और देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया. हालात ज्यादा बिगड़े. यह पहले से आजमाया हुआ एक विफल मॉडल है, कृपया यह बंद करें, यह काम नहीं आना वाला, हालात और खराब होंगे.
In the past 24 hours, Hurriyat leaders & workers of Jamaat organisation have been arrested. Fail to understand such an arbitrary move which will only precipitate matters in J&K. Under what legal grounds are their arrests justified? You can imprison a person but not his ideas.
Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) February 23, 2019
आपको बता दें कि पुलवामा हमले में करीब 40 जवान शहीद हो गये थे. इस हमले के बाद राज्य में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.