शुभम रावत-
नई दिल्ली: भारत ने इस बार जी-20 सम्मेलन की अध्यक्षता की।राजधानी दिल्ली में शनिवार और रविवार को आयोजित हुए इस वैश्विक शिखर सम्मेलन की बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुई। बैठक के पहले दिनभारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ ने भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (IECC EC) स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। वहींG-20 में पहले 20 देश शामिल थे अब इसमेंअफ्रीकी संघ भी शामिल हो गया है।
भारत को होगा फायदा
बताया जा रहा है कि जी-20 में अफ़्रीकी संघ के शामिल होने से भारत को काफी लाभ होगा। दरअसल अफ्रीकी संघ काफी लंबे समय से जी-20 में शामिल किए जाने की मांग कर रहा था। भारत ने अफ्रीकी संघ को G-20 में शामिल किए जाने की वकालत करते हुए सहमति जताई थी। इसके साथ ही भारत ने यह भीसाबित कर दिया है कि उसका ग्लोबल साउथ कहे जाने वाले विकासशील देशों का नेतृत्व करने का दावा गलत नहीं है।
तेजी से आगे बढ़ती भारतीयअर्थव्यवस्था
भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड बैंक समेत तमाम वैश्विक एजेंसियों का भी यही मानना है।G-20 में शामिल होने के लिए देश में आईं IMF की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ ने कहा किभारतीय अर्थव्यवस्था संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास के उच्च स्तर को बनाए रखने और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने के लिए संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं।
ग्लोबल ग्रोथ मेंभारत की भूमिका अहम
गीता गोपीनाथ ने आगे कहा है किग्लोबल ग्रोथ के इंजन के रूप में भारत की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है।साल 2027-28 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। आने वाले सालों में भारत की ग्लोबल डेवलपमेंट में अहम भूमिका होगी। गीता गोपीनाथन ने कहा कि वैश्विक ग्रोथ में भारत का योगदान 15 फीसदी तक पहुंच जाएगा।