संसद का विशेष सत्र…क्या होगा एजेंडा, छिड़ा घमासान

संतोष कुमार सिंह

नई दिल्ली: एक देश, एक विधान, एक निशान के अपने एजेंडा को पूरा करने के बाद नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक देश एक चुनाव के अपने वादे को अमली जामा पहुंचाने की दिशा में कवायद शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि इसके लिए केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर के बीच पांच दिनों के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है। हालांकि इस सत्र का एजेंडा घोषित तौर पर क्या होगा इसको लेकर अभी खुलासा नहीं हुआ है लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है उससे ये लगता है कि अब इस विषय पर सरकार ने गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है।

क्या कहते हैं संसदीय कार्यमंत्री

संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर लिखा, संसद का विशेष सत्र (17वीं लोकसभा का 13वां सत्र और राज्यसभा का 261वां सत्र) 18 से 22 सितंबर को बुलाया गया है।हालांकि, संसद के इस विशेष सत्र का एजेंडा क्या होगा, इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं बताया गया है। अचानक संसद के विशेष सत्र बुलाये जाने को लेकर मुंबई में इंडिया गंठबंधन की बैठक में जुटे नेता भी सवाल कर रहे हैं।

क्या कहते हैं विपक्षी नेता

शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन ठीक है, लेकिन उससे पहले निष्पक्ष चुनाव की बात कीजिए। निष्पक्ष चुनाव हमारा नारा है। जो आज देश में नहीं हो रहा है। हम निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं, इसी के लिए एक देश, एक चुनाव का फंडा लेकर आए हैं ये लोग।

वहीं कांग्रेस के नेता राशिद अल्वी ने कहा कि ये व्यवहारिक नहीं है। प्रधानमंत्री ये किस तरह से करेंगे, इसका ब्लू प्रिंट सामने आना चाहिए। विपक्ष से बात करनी चाहिए कि इस पर प्रधानमंत्री और केंद्र की क्या सोच है। वैसे प्रधानमंत्री की आदत हो गई है देश को सस्पेंस में रखते हैं। ये लोकतांत्रिक मर्यादा नहीं तानाशाही है।

सबसे तीखा हमला सीपीआई के वरिष्ठ नेता डी राजा ने बोला है। डी राजा ने कहा कि भाजपा में लंबे समय से चर्चा चल रही है। जब से भाजपा सत्ता में आई, भाजपा का ये जूनुन था कि एक देश,एक संस्कृति, एक देश, एक जात, एक देश, एक भाषा, एक देश, एक टैक्स और अब एक देश, एक चुनाव। फिर ये एक देश और एक पार्टी, और उसके बाद एक देश और एक लीडर, ये उनका जुनून है, जिससे वो परेशान हैं।

इस बीच मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक देश एक चुनाव की संभावना तलाशने के लिए एक समिति गठित की है। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से इस समिति को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि अभी तो समिति ही बनी है, इसमें इतना घबराने की क्या ज़रूरत है।

लंबे समय से उठती रही है मांग

एक देश, एक चुनाव का सीधा सा मतलब है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ करा लिए जाएं। इस मुद्दे पर देश में काफी समय से बहस चल रही है। ये एक ऐसा मुद्दा है जिसको प्रधानमंत्री खुद लंबे समय से उठाते रहे हैं। इसको लेकर सर्वदलीय बैठक भी पूर्व में बुलाई जा चुकी है लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला। पिछले महीने भी राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने एक देश-एक चुनाव को समय की जरूरत बताया था।

रामनाथ कोविंद को बड़ी जिम्मेवारी

देश के पूर्व राष्ट्रपति और कानूनविद् रामनाथ कोविंद को इस मसले पर बनाये गये कमिटी की जिम्मेदारी देकर सरकार ने बड़ा दाव खेला है। दरअसल रामनाथ कोविंद का कानून के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है और 1978 में कोविंद सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर नियुक्त हुए। 1980 से 1993 के बीच सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की स्टैंडिंग काउंसिल में भी रहे। कोविंद 1994 से 2000 तक और उसके बाद 2000 से 2006 तक राज्यसभा सदस्य रहे। अगस्त 2015 में बिहार के गवर्नर नियुक्त हुए।

इतना ही नहीं रामनाथ कोविंद बीजेपी का दलित चेहरा रहे हैं। वे दलित बीजेपी मोर्चा के अध्यक्ष रहे हैं। ऑल इंडिया कोली समाज के प्रेसिडेंट रहे हैं। कोविंद BJP के नेशनल स्पोक्सपर्सन रह चुके हैं, लेकिन वे लाइमलाइट से इतने दूर रहते थे कि प्रवक्ता रहने के दौरान कभी भी टीवी पर नहीं आए। रामनाथ कोविंद 25 जुलाई 2017 को भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 5 साल का कार्यकाल पूरा किया।वन नेशन वन इलेक्शन की कमेटी में उनकी नियुक्ति को अन्य विपक्षी पार्टियां भी नहीं खुलकर विरोध नहीं कर पाएंगी क्योंकि वो दलित चेहरा और देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं।

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