Mission Chandrayaan 3: विक्रम और प्रज्ञान दिखाएंगे कमाल, 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर उतरेगा चंद्रयान-3

नई दिल्लीःभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) ने 14 जुलाई को चंद्रयान-3 मिशन लांच किया था। वैज्ञानिक उम्मीद जता रहे हैं कि 23 अगस्त को यह यान सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतर जाएगा। दो दिन पहले 1 अगस्त को इसरो की तरफ से जानकारी दी गई थी कि चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल गया है और चंद्रमा की तरफ बढ़ रहा है। चंद्रयान-3 फिलहाल अच्छी स्थिति में है।

इसरो ने चंद्रयान-3 के लिए अपने लैंडर का नाम विक्रम और रोवर का नाम प्रज्ञान रखा है। यान के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद सारी महत्वपूर्ण जानकारियां इन्हीं के जरिए जुटाई जाएंगी। विक्रम(लैंडर) और प्रज्ञान(रोवर) चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक गतिविधियों को अंजाम देंगे और चंद्रयान-3 से जुड़े इसरो के वैज्ञानिक इन्हीं जानकारियों व तथ्यों के आधार पर अपने रिसर्च को आगे बढ़ाएंगे।

क्यों रखा गया है विक्रम और प्रज्ञान नाम

चंद्रयान-2 के लैंडर और रोवर का नाम भी यही था। चंद्रयान-3 में भी इनके नाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, वर्ष 2019 में चंद्रयान-2 मिशन का लैंडर चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया था। इस वजह से विक्रम(लैंडर) और प्रज्ञान(रोवर) काम नहीं कर पाए थे, लेकिन इस बार इसरो ने चंद्रयान-3 में ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे ये यान तभी सतह पर उतरेगा, जब उसे उतरने के लिए उपयुक्त जगह दिखेगी। यही वजह है कि इसमें अतिरिक्त ईंधन की व्यवस्था भी की गई है। चंद्रयान-3 के लैंडर का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम (Indian Space Programme) का जनक कहा जाता है। वहीं, प्रज्ञान का मतलब होता है बुद्धिमता। इसलिए चंद्रयान-3 के रोवर का नाम प्रज्ञान रखा गया है। यह नाम देने के पीछे वैज्ञानिकों का मानना है कि रोवर को अपनी तकनीक के जरिए चांद की सतह पर कई चीजों की जानकारी इकट्ठा करनी है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इससे पहले किसी और अंतरिक्ष एजेंसी ने जाने की कोशिश नहीं की

चंद्रयान-3 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाकर वहां के संबंध में सभी तरह के अध्ययन करना है, क्योंकि वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा की इस सतह पर बर्फ और धूप की प्रचुरता है। वैज्ञानिक यह भी मान रहे हैं कि भविष्य में मंगल मिशन के लिए इसका अध्ययन उनके लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है। इस मिशन की एक और खासियत यह है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इससे पहले कोई और अंतरिक्ष एजेंसी ने जाने की कोशिश नहीं की है।

जानें विक्रम और प्रज्ञान क्या करेंगे काम

चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद लैंडर(विक्रम) अपना काम करना शुरू कर देगा। लैंडिंग के कुछ मिनट बाद से ही ये इसरो को पहली तस्वीर भेजेगा और फिर जब तक ये चांद पर रहेगा अन्य जरूरी जानकारियां एकत्र करता रहेगा। साथ ही चंद्रमा से जुड़ी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक गतिविधियों को अंजाम देगा। लैंडर जहां सतह पर उतरेगा यानी लैंडिंग साइट के आसपास की भूकंपीयता को मापने के लिए चंद्र भूकंपीय गतिविधि (आईएलएसए) का काम करेगा। साथ ही प्लाज्मा घनत्व और इसकी विविधताओं का अनुमान लगाने के लिए लैंगमुइर जांच भी करेगा। वहीं, रोवर (प्रज्ञान) चंद्रयान के अंदर से करीब तीन घंटे बाद निकलेगा। ये रोवर 6 पहियों पर चलेगा। रोवर लैंडिंग साइट के आसपास मौलिक संरचना प्राप्त करने के लिए अल्फा कण एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) और लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस) तकनीक का इस्तेमाल कर जानकारी एकत्र करेगा। साथ ही सतह पर केमिकल विश्लेषण का काम करेगा और डेटा लैंडर को भेजेगा। लैंडर के जरिए ये डेटा इसरो के अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचेगा। लैंडर के पास निर्दिष्ट चंद्र स्थल पर सॉफ्ट लैंड करने और रोवर को तैनात करने की क्षमता होगी जो इसकी गतिशीलता के दौरान चंद्र सतह के इन-सीटू रासायनिक विश्लेषण करेगा। चंद्रयान-3 में एक स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल (एलएम), प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) और एक रोवर शामिल है, जिसका उद्देश्य अंतरग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई तकनीकों को विकसित और प्रदर्शित करना है। पीएम का मुख्य कार्य एलएम को लॉन्च व्हीकल इंजेक्शन से अंतिम चंद्र 100 किमी गोलाकार ध्रुवीय कक्षा तक ले जाना और एलएम को पीएम से अलग करना है।

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