“राष्ट्रीय गीत” के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती आज

नई दिल्ली:भारत के राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की आज जयंती है। उनका जन्म 27 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के कंथालपाड़ा में हुआ था। उनके पिता का नाम यादव चंद और मां का नाम दुर्गा देवी था। चटर्जी जी अपनी मां-बाप की सबसे छोटी संतान थें।

कानून की हासिल की डिग्री

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को बचपन से पढ़ाई-लिखाई में अत्यधिक रुची थी। प्रारम्भिक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंनेकानून की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उनकीनियुक्ति डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर हुई। चटर्जी ने कई सालों तक बंगाल सरकार में सचिव पद की भी जिम्मेदारी संभाली थी। साल 1891 में वो सरकारी सेवा से रिटायर हो गए थे।

चटर्जी ने अंग्रेजी हुकूमत में लिखा था राष्ट्रीय गीत

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने साल 1876 में भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम लिखा था। उस समय देश में अंग्रेजी हुकूमत थी। चटर्जी ने वंदे मातरम गीत लिखा था ये तभी सभी को पता है, लेकिन ये गीत उन्होंने क्यों लिखा था इस बात की जानकारी शायद कुछ ही लोग को होगी। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बंकिमचंद्र ने वंदे मातरम गीत क्यों लिखा था।

चटर्जी ने इसलिए लिखा था वंदे मातरम गीत

दरअसल बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ब्रिटिश हुुकूमत के दौरान सरकारी मुलाजिम थे। उसी दौरान ब्रिटिश सरकार ने एक फरमान सुनाया कि भारत में गॉड! सेव द क्वीन गीत को हर सरकारी समारोह में गाना अनिवार्य होगा। अंगेजी सरकार की यह बात चटर्जी को बिल्कुल भी रास नहीं आई। इसके बाद उन्होंने ऐसा गीत लिखने का फैसला किया जिसमें भारत की प्रशंसा हो। अपने इसी उद्देश्य को पूरा करने और जन-जन में आजादी की लौ जलाने के लिए चटर्जी नेसाल 1876 में वन्दे मातरम् गीत की रचना की।

आनंदमठ चटर्जीका सबसे लोकप्रिय उपन्यास

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्यायलोकप्रिय उपन्यासकार, कवि और पत्रकार और कानून के जानकार थे। आनंदमठ चटर्जीका सबसे लोकप्रिय उपन्यास है। इसी उपन्यास में सबसे पहले चटर्जी द्वारा रचित वंदे मारतम गीत प्रकाशित हुआ था। उन्होंने महज 27 साल की उम्र में बांग्ला भाषा मेंदुर्गेशनंदिनी उपन्यास की रचना की थी जो बहुत लोकप्रिय हुआ था। उनके सभी उपन्यासों को भारत की लगभग हर एक भाषा में अनुवाद किया गया है।8 अप्रैल 1894 कोबंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय नेदुनिया को अलविदा कह दिया था।

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