शिमला: हिमाचल में नदियों के लिए खतरे की घंटी बज उठी है। पहाड़ी क्षेत्रों में जो नदियों के ऊपर स्नो कवर होता है वो तेजी से पिघल रहा है। जिसके कारण मैदानी इलाकों में जब बांधों से पानी छोड़ा जाता है तो पानी का स्तर बढ़ने का खतरा तो रहता ही है साथ ही यह भी है कि यह किताना खतरनाक है और इससे साफ-साफ संकेत मिल रहे हैं कि तापमान पहाड़ों में किस तरह से बढ़ रहा है।
इन नदियों में आया है परिवर्तन
प्रदेश की विभिन्न नदियों, घाटियों में एडब्ल्यूआईएफएस सैटेलाइट के माध्यम से यह मैपिंग की गई है। इनमें चंद्रा, भागा, म्याड़, ब्यास, पार्वती, जीवा, पिन, स्पीति और बासपा नदी और बेसिन को लिया गया है। इन पर किए गए आकलन के मुताबिक वर्ष 2022-23 में अक्तूबर के दौरान वर्ष 2021-22 के मुकाबले चिनाब बेसिन के स्नो कवर में 36 फीसदी, रावी बेसिन में 54 फीसदी और सतलुज बेसिन में 27 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
सतलुज में हुई है बढ़ोतरी
ब्यास बेसिन के स्नो कवर में तीन फीसदी की हल्की बढ़ोतरी हुई है। नवंबर में चिनाब बेसिन में वर्ष 2021-22 के मुकाबले 2022-23 में पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ब्यास घाटी में 21 फीसदी, रावी में तीन और सतलुज बेसिन में 22 फीसदी की गिरावट की दर्ज की गई है। दिसंबर में सतलुज बेसिन में 56 फीसदी और चिनाब घाटी में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
जनवरी से हुआ है बदलाव
जनवरी में चिनाब घाटी में स्नो कवर पांच फीसदी, ब्यास में 16 फीसदी, रावी में 3 फीसदी और सतलुज में 38 फीसदी कम हुआ है। इसी तरह से फरवरी में चिनाब बेसिन में 4 फीसदी, ब्यास बेसिन 13 फीसदी और 17 फीसदी की गिरावट सतलुज बेसिन में आई है।