नई दिल्ली: साल 2002 में गुजरात में हुए गोधरा कांड के बाद भीषड़ दंगों की पीड़िता बिलकिस बानो के 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका समीक्षा को सुप्रीमि कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
बिलिकस बानों ने सुप्रीम कोर्ट में उसके साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए 11 लोगों की जल्द रिहाई को चुनौती दी थी।जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई करते हुएदायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दियाहै। बिलकिस बानो द्वरा ज्लद रिहाई की चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात सरकार ने एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दायर कर सूचित किया था कि सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए गए सभी दोषियों को उनके अच्छे व्यवहार और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद जेल में 14 साल की सजा पूरी करने के बाद रिहा किया गया था।
जल्दी रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में, गुजरात सरकार ने एक हलफनामा दायर कर सुप्रीम कोर्टको सूचित किया था कि 11 दोषियों को उनके अच्छे व्यवहार और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद जेल में 14 साल पूरे करने के बाद रिहा किया गया है।
इसलिए मिली दोषियों को रिहाई
बिलकिसबानोंकेसकेसभी11 दोषियोंकोइस मामले के 6 साल बाद 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी ठहराया था। इसीसाल15 अगस्तकोगोधराउप-जेलसेरिहाईदेदीगईथी।रिहाईकी यह अनुमतिगुजरातसरकारनेअपनी छूट नीति के तहत दी थी। दरअसल दोषियों ने 9 जुलाई 1992 नीति के तहत सुप्रीम कोर्ट में जल्द नीति के तहत आवेदन किया था सुप्रीम कोर्ट ने तब गुजरात सरकार को निर्देश दिया था कि वह आवेदन पर विचार करे क्योंकि छूट या समय से पहले रिहाई सहित सभी कार्यवाहियों पर नीति के संदर्भ में विचार किया जाना था जो गुजरात राज्य में लागू है।
क्या था पूरा मामला
आज से 20 साल पहले यानि साल 2002 में गुजरात में भीषण हिंसा हुई थी। ट्रेन में आग लगा दी गई थी। जिसके बाद पूरे शहर में दंगे भड़क उठे थे। बिलकिस बानों ने 11 लोगों के ऊपर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। साथ ही उनके परिवार के सात लोगो की निर्मम हत्या भी कर दी गई थी। जिसमें उनकी 3 साल की बेटी भी शामिल थी। जब यह घटना हुई तब बिलकिस 5 महीने की गर्भवती थी। इस मामले में दोषियों को साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाई थी। जिन्हें 14 साल बाद 15 अगस्त 2022 को रिहाई दे दी गई थी।