अटल जी का सपना हो रहा साकार, मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी माध्यम में

प्रो.मोहन लाल छीपा

आज मेरी प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं जब अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में संस्थापक कुलपति के रूप में 2012 में कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात अभियांत्रिकी एवं चिकित्सा शिक्षा के हिंदी माध्यम के वृक्ष का बीज रोपित किया तथा अक्टूबर 2022 में मध्यप्रदेश शासन की सक्रिय भागीदारी से उसके फल मिलना प्रारंभ हो गए। 16 अक्टूबर 2022 को भारत के माननीय गृहमंत्री अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान माननीय मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश एवं विश्वास कैलाश सारंग माननीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री मध्य प्रदेश द्वारा एमबीबीएस प्रथम वर्ष की हिंदी पुस्तकों का विमोचन देश में पहली बार हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई प्रारंभ करने की दृष्टि से करेंगे। वे सब बधाई के पात्र हैं |

यह मेरा सौभाग्य है कि हिंदी में चिकित्सा शिक्षा का आधार अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय में 2012-2017 तक तैयार किया गया। चिकित्सा क्षेत्र की नियामक संस्थाओं से पत्राचार, हिंदी माध्यम से स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा शोध ग्रंथ लिखने वालों का सम्मान, एमबीबीएस के सभी पाठ्यक्रमों को हिंदी में अनुवाद, हिंदी माध्यम से देश में उपलब्ध सभी तरह की चिकित्सा पुस्तकों(300) का संकलन,हिन्दी माध्यम से चिकित्सा शिक्षा की पुस्तकें लिखने वाले लेखकों से संपर्क, हिन्दी माध्यम से चिकित्सा शिक्षा की पुस्तकें प्रकाशित करने वाले प्रकाशकों से संपर्क ,अंग्रेजी माध्यम के लेखकों से उनकी पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद करने के लिए वार्ता, हिंदी माध्यम से चिकित्सा शिक्षा के लिए प्रवासी भारतीयों से संपर्क, लोक स्वास्थ्य वैकल्पिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना, गर्भ संस्कार तपोवन केंद्र की स्थापना, डायलिसिस टेक्निशियन, मेडिकल लैब तकनीशियन एक्स-रे टेक्निशियन,ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन पत्रोपाधि पाठ्यक्रमों की मध्यप्रदेश शासन से स्वीकृति व प्रवेश हेतु विज्ञापन आदि प्रमुख कार्य हुए जिनके आधार पर चिकित्सा शिक्षा का ढांचा खड़ा किया गया।

आज दुनिया के हिंदी के शुभचिंतकों के लिए सुनहरा दिवस है जब हिंदी में मेडिकल शिक्षा को असंभव मानने वाले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारी हिंदी विश्वविद्यालय की बातों पर आश्चर्य व्यक्त करते थे, वे आज यह महसूस करेंगे कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। यदि सभी संबंधित लोग समर्पण एवं सेवा भाव से उस कार्य में लग जाए तो अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं। मैं, अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय के उन सभी शिक्षकों, अधिकारीयों, कर्मचारियों को बधाई देना चाहूंगा जिन्होंने विश्वविद्यालय की मेडिकल शिक्षा व अभियांत्रिकी शिक्षा की आधारशिला रखने में मदद की तथा जिन शिक्षकों ने पुस्तकों का अनुवाद कर हमारे कार्य को आगे बढाया और आज परिणाम उनके सामने मौजूद है। आज के दिन माननीय के.एस.सुदर्शन जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक, अटल बिहारी वाजपेईजी की आत्मा को शांति मिलेगी जिन्होंने 1986 -87 में हिंदी माध्यम से अभियांत्रिकी व मेडिकल शिक्षा का सपना देखा था।

(लेखक अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय,भोपाल के संस्थापक कुलपति है।)

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