संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: सत्ताधारी जनता दल (JDU) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुक्रवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है और ललन सिंह अब निवर्तमान अध्यक्ष हो गये हैं। इस बात के कयास पिछले कई दिन से लगाये जा रहे थे। लेकिन जैसा कि अमूमन होता है कि नेता सारा ठीकरा मीडिया पर फोड़ देते हैं। लेकिन जहां आग होता है वहीं धुआं उठता है ये पुरानी कहावत है। JDU के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और नीतीश कुमार को अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा।
बड़ी बात यह है कि निवर्तमान अध्यक्ष ललन सिंह ने अपने इस्तीफे के बाद तर्क दिया है कि लोकसभा चुनाव में सक्रियता को देखते हुए मैंने ये फैसला लिया है। नीतीश कुमार के अध्यक्ष बनने की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। ये दूसरी बार होगा जब पार्टी की कमान नीतीश कुमार के हाथ में होगी। लेकिन ललन सिंह का ये इस्तीफा अचानक नहीं हुआ है। इसकी पटकथा बिहार में कई माह पहले लिखी जा रही थी। जिसके कारण दोनों में ये दूरियां बढ़ गई।
पार्टी सूत्रों की माने तो चार माह पहले यानी 13 सितंबर को नीतीश कुमार ने पार्टी के प्रखंड अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों के साथ मैराथन बैठक की थी। इस बैठक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह गायब रहे। जब इसकी चर्चा तेज हुई, तब पार्टी की तरफ से बयान जारी किया गया कि वे बीमार हैं। हालांकि बैठक से एक दिन पहले ही उन्होंने राजगीर में एक बड़ी सभा को संबोधित किया था।
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उसके बाद नीतीश कुमार ने विधानसभा प्रभारियों की बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद बड़ी अजीबोगरीब तस्वीर बनी कि बैठक खत्म होने के बाद ललन सिंह और भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी के बीच जमकर नोक झोंक हुई। ये घटनायें इस बात की तरफ इशारा कर रही थीं पार्टी में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। आगे चलकर यह खबर इन दो घटनाओं के बाद ये लगभग तय हो गया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। ये भी खबरें आईं की ललन सिंह और नीतीश कुमार और ललन सिंह में सबकुछ ठीक नहीं है और पार्टी का एक धड़ा नीतीश कुमार को ये समझाने में लगा है कि ललन सिंह लालू परिवार के करीब आ गये हैं।
कहते हैं न कि दूध का जला मट्ठा भी फूंक के पीता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्थिती भी कमोबेश यही है। ये सर्वविदित है कि वर्ष 2020 के पहले 020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने टिकट बंटवारे की जिम्मेदारी जेडीयू के नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को दी गई थी। इसमें आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार की मर्जी के खिलाफ न केवल टिकट बांटे, बल्कि केंद्रीय मंत्री भी बन गए। आखिरकार उन्हें पार्टी से बाहर निकालना पड़ा।
नीतीश कुमार को यह लगने लगा था कि ललन सिंह भी 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले मनमानी करते दिख रहे हैं। ऐसे में उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक में साफ संकत दिया था कि वे लोकसभा चुनाव मजबूती से लड़ना चाहते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि इस बार वे 2020 की गलती नहीं दोहराएंगे।
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और हुआ भी ऐसा ही इस बैठक के 100 दिन बाद ललन सिंह की राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से विदाई हो गई। दरअसल ये सब अनायास नहीं हुआ है बल्कि नीतीश कुमार ने सोची समझी रणनीति के तहतलोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की कमान अपने हाथ में लिया और ललन सिंह को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया।
अब देखा जाना होगा कि चूड़ा में दही फेटायेगा का नहीं या ललन सिंह के मंसबों पर नीतीश कुमार ने मट्ठा मिला दिया है। अध्यक्षी तो खरवास में गई है और मकर संक्राती का पर्व चूरा दही के साथ मनाया जाता है, शायद बिहार की राजनीति का वर्तमान हलचल उस समय तक नतीजे पर पहुंचे।