भारत ने रीजनल कॉम्प्रिहंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप यानि RCEP में शामिल न होने का फैसला लिया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि RCEP के तहत कोर हितों पर कोई समझौता नहीं होगा। आरसीईपी समझौता अपनी मूल मंशा को नहीं दर्शा रहा था और इसके परिणाम संतुलित और उचित नहीं होंगे। भारत ने इस समझौते के लिए कुछ नई मांग रखी थी। भारत का कहना था कि इस समझौते में चीन की प्रधानता नहीं होनी चाहिए, नहीं तो इससे भारत को व्यापारिक घाटा होगा।
बैंकॉक में चल आसियान शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ओपनिंग स्पीच में भी RCEP का जिक्र नहीं किया। उन्होंने केवल वर्तमान व्यापार समझौतों में सुधार की बात ही की थी। RCEP में भारत के शामिल होने के खिलाफ किसान देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। खासकर किसान संगठनों कड़ी आपत्ति जता रहे थे। किसानों का कहना है कि ये संधि होती है तो देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को इनके उत्पाद का जो मूल्य मिल रहा है, उसमें गिरावट आ जाएगी।
दरअसल RCEP एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो कि सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में कई सहूलियत देगा। इसके तहत निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं देना पड़ेगा या तो बहुत कम देना होगा। इसमें आसियान के 10 देशों के साथ अन्य 6 देश हैं। RCEP में 10 आसियान देशों के अलावा भारत, चीन, जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यू जीलैंड भी शामिल हैं।