सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रदूषण के मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए तथा राज्यों की सरकार को कड़ी फटकार लगते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा और यूपी के मुख्य सचिव को बुधवार कोर्ट में पेश किया जाये। साथ ही राज्य सरकार, डीएम, तहसीलदार, पुलिस सबको आदेश देते हुए कहा कि पराली जलने की एक भी घटना न हो।
दिल्ली सहित उत्तर भारत में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। वहीँ, केंद्र सरकार ने पराली जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में माना कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की मुख्य वजह पराली जलाना है। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में 2016-18 के बीच पराली जलाने में 41 फीसदी कमी हुई है। वहीँ, पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि पराली जलाने से रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। वही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर ऐसा होगा तो चीफ सेक्रेटरी से लेकर ग्राम पंचायत तक, एक-एक अधिकारी का दोष माना जाएगा। दिल्ली सरकार और नगर निगम साथ मिल कर काम करें।स्थानीय स्तर पर धूल, कचरे का धुआं न होने दें। दिल्ली-NCR में नया निर्माण और पुराना निर्माण गिराने की सभी कार्रवाई तुरंत बंद होने चाहिए।
साथ ही कहा कि ऑड ईवन के दौरान टू व्हीलर और थ्री व्हीलर का इस्तेमाल बढ़ गया है। कुछ कारों को रोकने से लाभ नहीं हो रहा। डीज़ल गाड़ियां भी दिल्ली में आ रही हैं। टैक्सी चल रही है। दिल्ली सरकार इस पर जवाब दे।उसके पास क्या आंकड़े हैं, शुक्रवार तक जवाब दे।
वहीँ, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के प्रदूषण के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। केजरीवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में जल रही पराली की वजह से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ गया है। खट्टर अंकल और कैप्टन अंकल से भी रिक्वेस्ट करते हैं कि पराली जलना बंद कर दें।