बीजेपी सरकार ने जनरल प्रोविडेंट फण्ड और इससे जुड़े अन्य योजनाओं के लिए ब्याज दर में मामूली कमी की है. पिछली तीन तिमाहियों में इन योजनाओ में 8 फीसदी की ब्याज दर मिल रही थी, लेकिन वित्तवर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए व्याज दर को 7.9 फीसदी कर दिया गया है. ब्याज़ दर घटने से केंद्र सरकार, रेलवे और रक्षा क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों को नुकसान होगा.
जनरल प्रोविडेंट फण्ड असल में सरकारी कर्मचारियों का भविष्य निधि फण्ड (पीएफ) होता है. इस फण्ड में सरकारी कर्मचारियों के वेतन का एक निश्चित हिस्सा जमा होता है. जो उन्हें रिटायरमेंट के वक़्त मिलता है. वित्तमंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है, वित्तवर्ष 2019-20 के दौरान यह सामान्य सुचना दी जाती है कि जनरल प्रोविडेंट फण्ड और इसके समान अन्य फण्ड के लिए ब्याज़ दर 1 जुलाई 2019 से 7.9 फीसदी कर दी गयी है.
इस फंड के तहत 31 दिसंबर, 2003 या उससे पहले नियुक्त कर्मचारियों का पीएफ जमा होता है. जिन अन्य फंड के लिए ब्याज दर घटाया गया है, उनमें ऑल इंडिया सर्विसेवज प्रोविडेंट फंड, स्टेट रेलवे प्रॉविडेंट फंड, जनरल प्रोविडेंट फंड, इंडियन ऑर्डनेंस डिपार्टमेंट प्रोविडेंट फंड, इंडियन ऑर्डनेंस फैक्टरीज वर्कमेन्स प्रोविडेंट फंड, कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड, इंडियन नवल डॉकयार्ड वर्कमेन्स प्रोविडेंट फंड, डिफेंस सर्विसेज ऑफिसर्स प्रोविडेंट फंड और आर्म्ड फोर्सेज पर्सनल प्रोविडेंट फंड शामिल हैं.
इसके पहले अक्टूबर 2018 में जीपीएफ की ब्याज़ दर में बदलाव कर ब्याज़ दर को 0.4 फीसदी बढ़ाकर 8 फीसदी किया गया था. पिछले महीने ही सरकार ने पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड (पीपीएफ), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) जैसी छोटी बचत योजनाओं के ब्याज़ दर में भी 0.1 फीसदी की कटौती की थी.
पीपीएफ और एनएससी पर ब्याज़ दर 7.9 फीसदी और किसान विकास पत्र पर ब्याज़ दर 7.6 फीसदी कर दिया गया था. मार्च 2017 में सरकार ने जीपीएफ निकालने के नियम को बदला. इस बदलाव के बाद जीपीएफ का भुगतान 15 दिन क अंदर प्राप्त किया जा सकता था. कर्मचारी नौकरी के 10 वर्ष पूरा होने पर भी कुछ विशेष जरूरतों के लिए भी जीपीएफ निकाल सकते हैं, इस बदलाव से पूर्व जीपीएफ 15 वर्षो के बाद ही प्राप्त किया जा सकता था.
गौरतलब है कि कर्मचारी भविष्य निधि में जमा रकम पर वित्तवर्ष 2018-19 में 8.65 फीसदी ब्याज़ देने का केंद्र सरकार ने निर्णय लिया था.