पीसी चाको ने शीला दीक्षित को चिट्ठी लिख कहा है कि, चूंकि आप बीमार हैं इसलिए आपकी अनुपस्थिति में प्रदेश के तीनों कार्यकारी अध्यक्ष स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे और जो भी फैसले लिए जाएंगे उसकी रिपोर्ट आपको दी जाती रहेगी. पीसी चाको ने चिट्ठी में नाराजगी जताते हुए ये भी लिखा कि आपको फोन किया लेकिन आपने नहीं उठाया. जहां शीला गुट नए ब्लॉक अध्यक्ष चुनने की कवायद में जुटा है वहीं, अन्य सभी गुट खिलाफत में लगे हैं. आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस का संगठन कमजोर होता नजर आ रहा है. लोकसभा चुनाव में जिस तरह पार्टी का पुराना वोट बैंक वापस आया था, अब आपसी लड़ाई में खिसकने के ज्यादा आसार रणनीतिकारों को लग रहे हैं.
शीला कैंप से पूर्व सांसद ही नहीं, पूर्व विधायकों का भी एक बड़ा वर्ग नाराज है एवं कार्यकारी अध्यक्ष भी रुख कुछ सही नही हैं. ऐसे में पार्टी में बिखराव दिख रहा है. दरअसल, शीला कैंप में ज्यादातर उनके पूर्व कैबिनेट के मंत्री हैं, जिससे पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं में नाराजगी है. बीते शनिवार को प्रदेश प्रभारी पीसी चाको ने शीला दीक्षित को पत्र लिखकर ब्लॉक कमेटी के नए सिरे से गठन करने पर नाराजगी जाहिर की थी. कार्यकारी अध्यक्षों ने भी राहुल गांधी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई. दिल्ली में जिला और ब्लॉक पर्यवेक्षकों की लिस्ट आने के बाद दिल्ली कांग्रेस में गुटबाजी तेज हो गईहै.
खबरों के मुताबिक माने तो कार्यकारी अध्यक्षों से इस बारे में राय नहीं ली गई. आरोप लगाया कि मनमाने तरीके से पर्यवेक्षकों की सूची जारी कर दी गई. उधर, प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव नजदीक हैं, इसलिए पर्यवेक्षक बनाना जरूरी था, ताकि ये पर्यवेक्षक जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं से विचार-विमर्श करके जिला व ब्लॉक अध्यक्ष बना सकें.