भारत में यूँ तो बहुत से अलग अलग धर्म है जो लोगों की पहचान को एक दूसरे से अलग बनाते है। लेकिन एक धर्म ऐसा भी है जो सभी भारतीयों को एक साथ जोड़ता है और वो है क्रिकेट। भारत में क्रिकेट किसी धर्म से कम नही है। क्रिकेट में भारत की जीत का जश्न किसी त्यौहार से कम नहीं मनाया जाता। हमारा राष्ट्रिय खेल ना होते हुए भी इसकी लोकप्रियता अन्य देशो के मुक़ाबले भारत में सबसे ज़्यदा है।
इस खेल की शुरुआत अंग्रेज़ो ने लगभग आज से 200वर्ष पहले की थी। 1975 में क्रिकेट के इतिहास का पहला विश्वकप खेला गया था। आज ही के दिन 25जून 1983में कपिल देव की अगुवाई में भारतीय टीम ने अपना पहला विश्वकप अपने नाम किया था। भारतीय टीम ने फाइनल में वेस्ट इंडीज की टीम को शिकस्त दी थी। वेस्ट इंडीज उस वक़्त की सबसे घातक टीम हुआ करती थी और उससे पहले वह दो विश्वकप अपने नाम कर चुकी थी। 83 के वर्ल्डकप में भी वेस्ट इंडीज को ही विश्वकप का प्रवल दावेदार माना जा रहा था।
कपिल देव ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया की उन्हें कभी नहीं लगा था की वह 83 का विश्वकप जीत पाएंगे। जब भी विश्वकप के फाइनल का ज़िक्र होता है तो कपिल देव के द्वारा विव रिचर्ड्स का वो शानदार कैच आँखों के सामने आ जाता है। भारत ने उस मुक़ाबले में वेस्टइंडीज को 183 रानो के छोटे से लक्ष्ये के सामने 140 रनों पर समेट कर अपना पहला विश्वकप जीता। भारत के लिए 25 जून की वह तारीख भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिख गई।