श्रीलंका में राष्ट्रपति ने कैबिनेट की बैठक बुलायी

ईस्टर रविवार बम विस्फोट की अलग संसदीय जांच शुरू करने के श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के गुट के फैसले पर बैठक के बहिष्कार की धमकी के कुछ ही दिन बाद राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की।

उन्होंने खुफिया जानकारी की पूर्व उपलब्धता के बावजूद घातक हमले को रोकने के लिए जिम्मेदारी के निर्वाह को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के दो धड़ों के बीच जारी आंतरिक लड़ाई के बीच यह बैठक बुलाई है।

राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह अपने गठबंधन सहयोगी के साथ गतिरोध पर बैठक नहीं बुलाई थी। वह संकटग्रस्त गठबंधन सरकार में मंत्रिमंडल के प्रमुख हैं ।

सिरिसेना चाहते थे कि हमले के वजहों की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष कारू जयसूर्या द्वारा नियुक्त संसदीय प्रवर समिति (पीएससी) की कार्यवाही रोकी जाए। इस हमले में 11भारतीय समेत 258लोगों की मौत हो गयी थी जबकि लगभग 500लोग घायल हो गए थे।

राष्ट्रपति ने धमकी दी थी कि वह कैबिनेट की बैठक दोबारा तब तक नहीं बुलायेंगे जब तक सरकार प्रवर समिति की कार्यवाही नहीं रोकती है ।

सिरिसेना ने दावा किया कि इस कमेटी की कार्यवाही का लक्ष्य रक्षा मंत्री होने के नाते खुफिया विफलताओं की जिम्मेदारी उनपर डालना है।

प्रवर समिति में प्रस्तुत साक्ष्य से पता चलता है कि रक्षा संस्थान में शीर्ष स्तर पर लापरवाही बरती गयी और हमले से पहले प्राप्त खुफिया जानकारी को नजरअंदाज किया गया ।

सिरिसेना ने कहा कि वह संसदीय जांच में सहयोग नहीं करेंगे और न ही पुलिस और रक्षा अधिकारियों को समिति के समक्ष पूछताछ के लिए पेश होने की अनुमति देंगे ।सरकार और अध्यक्ष जयसूर्या ने यह स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया रोकी नहीं जाएगी ।

शनिवार को सिरिसेना ने राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख सिसिरा मेंडिस को बर्खास्त कर दिया था । मेंडिस ने कथित रूप से कहा था कि हमले को टाला जा सकता था। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा था कि राष्ट्रपति आतंकवादियों के खतरों का आकलन करने के लिए नियमित सुरक्षा बैठकें करने में विफल रहे थे।

भारत ने श्रीलंका के साथ इस हमले के संबंध में हमले से हफ्तों पहले खुफिया जानकारी साझा किया था ।

गौरतलब है कि 21 अप्रैल को श्रीलंका में नौ आत्मघाती हमलावरों ने सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम दिया था।

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