Anti Paper Leak Bill: लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राहुल गांधी के भाषण के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी पर असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने और तथ्यों के बिना गंभीर आरोप लगाने का आरोप लगाया। साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट या सक्षम प्रशासनिक अधिकारी द्वारा दिया जाता है।
राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर छात्रों पर गोली चलाई गई। इस बयान पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण पेश नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में गोली चलाने का निर्णय मंत्री नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट, डीएम या एसडीएम जैसे अधिकृत प्रशासनिक अधिकारी लेते हैं।
‘तथ्यों के बिना लगाए आरोप’
जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये शब्द किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं थे, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनका संबोधन किसके लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बिना तथ्यों के सदन में कई बातें कहीं और दावा किया कि छात्रों पर गोली नहीं चली थी, बल्कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टियर गैस का इस्तेमाल किया गया था।
पीएम आवास वाले बयान पर भी साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के हालिया विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नहीं बन पाने के कारण वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर बैठ गए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले राहुल गांधी आंदोलन से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन बाद में उसमें शामिल हो गए। जितेंद्र सिंह ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सार्वजनिक जीवन और संसदीय प्रक्रियाओं की बेहतर समझ होनी चाहिए तथा सदन में तथ्यों के आधार पर ही आरोप लगाने चाहिए।
राहुल गांधी के भाषण के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी आपत्ति जताई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें कई बार टोका और असंसदीय शब्दों के प्रयोग से बचने की सलाह दी। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐसे शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की।