नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का प्रमुख एजेंडा क्षेत्रीय सेना (टेरीटोरियल आर्मी) था।
समिति को क्षेत्रीय सेना के जनादेश, उपलब्धियों तथा भविष्य की रूपरेखा के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि क्षेत्रीय सेना ‘नागरिक-सैनिक’ की अवधारणा का जीवंत प्रतीक है। यह बल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आपदा प्रतिक्रिया, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देता है।
क्या है क्षेत्रीय सेना
समिति के सदस्यों ने क्षेत्रीय सेना की प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु कई उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए। इन सुझावों का उद्देश्य इसकी क्षमता का विस्तार करना तथा राष्ट्र सेवा में इसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना है। क्षेत्रीय सेना भारतीय सशस्त्र बलों का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह आम नागरिकों को सैन्य प्रशिक्षण प्रदान कर देश की सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी का अवसर देती है। नियमित सेना का पूरक होने के नाते यह बल शांतिकाल और आपात दोनों स्थितियों में अपनी भूमिका निभाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र होगा मजबूत
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय सेना के भविष्य के रोडमैप पर भी गहन चर्चा हुई। सदस्यों ने इसकी विस्तार योजनाओं तथा आधुनिक सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सुधारों पर विचार-विमर्श किया।यह बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। रक्षा मंत्री ने सदस्यों के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्रीय सेना देशभक्ति और राष्ट्र सेवा का अनुकरणीय उदाहरण है। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। सरकार क्षेत्रीय सेना के योगदान को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।