नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत और अफ्रीका के बीच साझेदारी बेहद अहम हो गई है। उन्होंने कहा कि यह संबंध एक अशांत और अनिश्चित दुनिया में “स्थिरता” और “विश्वसनीयता” का संदेश देगा।
शिखर सम्मेलन की तैयारी और वैश्विक स्थिति
जयशंकर ने आगामी इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट (IAFS) के चौथे संस्करण के लोगो, थीम और वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर यह बात कही। यह शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई तक आयोजित होगा। इसका विषय ‘स्थायी साझेदारी, साझा दृष्टिकोण’ रखा गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय जटिल भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में भारत-अफ्रीका सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
मजबूत होते संबंध और ऐतिहासिक जुड़ाव
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका केवल विकास साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक बेहतर दुनिया के निर्माण में भी साझेदारहैं। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीका में 17 नए दूतावास/मिशन खोले हैं, जिससे वहां भारतीय मिशनों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है। जयशंकर ने दोनों क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और उपनिवेशवाद विरोधी संघर्ष से जुड़े गहरे संबंधों पर भी प्रकाश डाला।
वैश्विक मंच पर सहयोग और भविष्य की दिशा
जयशंकर ने कहा कि भारत का ‘विकसित भारत 2047’ और अफ्रीका का ‘एजेंडा 2063’ एक-दूसरे के पूरक हैं और सतत विकास की दिशा में साझा रोडमैप प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक मंचों पर अफ्रीका के उचित प्रतिनिधित्व का लगातार समर्थन करता रहा है। इस दिशा में 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को शामिल करना एक ऐतिहासिक कदम रहा।