Indian LPG tanker: भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर नंदा देवी युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित होकर मंगलवार तड़के भारत पहुंच गया। इससे पहले पहला जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर उतरा था। दोनों जहाजों पर कुल लगभग 92,712 टन एलपीजी है, जो देश में एक दिन की खाना पकाने की गैस की जरूरत के बराबर है। जहाज पर मौजूद एलपीजी उतारने का काम शुरू हो गया है और नंदा देवी मुख्य जहाज से छोटे जहाजों में गैस स्थानांतरित कर रही है।
यात्रा और सुरक्षित पारगमन
दोनों जहाजों ने 13 मार्च को यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। इस सुरक्षित पारगमन के साथ युद्ध क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या चार हो गई है। वर्तमान में फारस की खाड़ी में कुल 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनमें 611 नाविक सवार हैं। पश्चिमी हिस्से में 22 और पूर्वी हिस्से में दो जहाज अभी भी खड़े हैं। पूर्वी हिस्से में मौजूद कच्चे तेल का टैंकर जग लाडकी मंगलवार को भारत पहुंचने वाला है, जबकि टैंकर जग प्रकाश जलडमरूमध्य पार कर चुका है और अफ्रीका की ओर बढ़ रहा है।
फारस की खाड़ी में जहाजों का संचालन
पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों में एलपीजी और एलएनजी टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, रासायनिक उत्पाद परिवहन करने वाले जहाज, कंटेनर जहाज, बल्क कैरियर और ड्रेजर शामिल हैं। इनमें से कुछ जहाज खाली हैं या रखरखाव के लिए डॉक्स में हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय इन जहाजों की निगरानी कर रहा है और सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं, ताकि युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ता है और हाल के घटनाक्रमों के बाद यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है। जब युद्ध शुरू हुआ, तब जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में 24 और पूर्वी हिस्से में चार जहाज सहित कुल 28 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद थे।
भारतीय नाविक और आपूर्ति की स्थिति
भारत में लगभग 3.18 लाख नाविक हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत हैं। युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों ने यह दिखा दिया है कि देश की ऊर्जा और समुद्री आपूर्ति प्रणाली जटिल परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर रही है।