स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ में ट्रम्प को बड़ा झटका, जर्मनी-जापान समेत कई देशों ने अपनी सेना भेजने से किया इनकार

Israel US Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश में बड़ा झटका लगा है। डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से अपील की थी कि वे अपने युद्धपोत (warships) भेजकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा में मदद करें, जहां ईरान ने तेल टैंकरों पर हमलों और ब्लॉकेज के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है।

ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट किया था कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन समेत अन्य देशों को जहाज भेजने चाहिए, क्योंकि ये देश इस रूट से तेल पर बहुत निर्भर हैं (खासकर चीन 90% तेल इसी से आयात करता है)। उन्होंने NATO सहयोगियों को भी चेतावनी दी कि अगर मदद नहीं मिली तो गठबंधन का भविष्य “बहुत बुरा” हो सकता है। मगर जापान-जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया समेत कई प्रमुख देशों ने स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ में अपनी सेना भेजने से इनकार कर दिया है।

प्रमुख देशों की प्रतिक्रियाएं और इनकार:

  • जर्मनी: जर्मनी ने ट्रंप के प्रस्ताव से स्पष्ट इनकार कर दिया। जर्मन सरकार और विदेश मंत्री ने कहा कि यह NATO का युद्ध नहीं है, और वे किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होंगे। जर्मनी ने होर्मुज में कोई सक्रिय भूमिका निभाने से मना कर दिया।
  • जापान: जापान ने ट्रंप की अपील पर कोई जहाज भेजने की पुष्टि नहीं की, बल्कि विचार कर रहा है लेकिन सैन्य तैनाती से दूर रहने का रुख अपनाया।
  • अन्य यूरोपीय और सहयोगी देश: फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन आदि ने भी जहाज भेजने से इनकार किया या केवल “विचाराधीन” बताया। फ्रांस ने कहा कि संघर्ष बढ़ने पर वे जहाज नहीं भेजेंगे। कई रिपोर्ट्स में जर्मनी, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया को स्पष्ट इनकारकर्ता बताया गया है।
  • चीन की प्रतिक्रिया: चीन ने सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया। चीन ने तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की और डी-एस्केलेशन पर जोर दिया। चीन ने कहा कि वह मध्य पूर्व में शांति बहाली के लिए “रचनात्मक भूमिका” निभाएगा। चीन ने ईरान से बातचीत कर तेल टैंकर पास करवाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी गठबंधन में शामिल होने से इनकार किया। चीन ने ईरान को अपना “सच्चा दोस्त” बताया और सैन्य मदद नहीं देने का रुख अपनाया।

ट्रंप ने क्यों की थी अपील?

ट्रंप की यह अपील इसलिए आई क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर हमले किए हैं। बदले में ईरान स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ में दुश्मन के तेल के सभी जहाज़ों को निशाना बना रहा है। इसलिए ट्रम्प ने स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज को फ्री कराने के लिए अन्य देशों से सेना भेजने की अपील की थी, लेकिन सहयोगी देश सीधे संघर्ष में शामिल होने से हिचक रहे हैं, ताकि स्थिति और न बिगड़े। नतीजा: ट्रंप का प्रस्तावित गठबंधन अभी तक मजबूत नहीं बन पाया, और अमेरिका अलग-थलग दिख रहा है। वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन कोई बड़ा देश सेना भेजने को तैयार नहीं। यह स्थिति ईरान-अमेरिका/इजरायल युद्ध के बीच ऊर्जा संकट को और गहरा कर रही है।

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